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चीन का ‘फ्लोटिंग आइलैंड’ लॉन्च: गहरे समुद्र में रिसर्च की नई क्रांति

Published on: March 31, 2026
China's 'floating island'
द  देवरिया न्यूज़,बीजिंग : चीन ने समुद्री अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया का पहला ओपन-सी फ्लोटिंग रिसर्च प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। ‘डीप-सी फ्लोटिंग आइलैंड’ नामक इस अत्याधुनिक सुविधा को शनिवार को शंघाई में पेश किया गया। यह प्लेटफॉर्म गहरे समुद्र में हर मौसम में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है और इसे समुद्री विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

यह रिसर्च प्लेटफॉर्म समुद्र की कठिन परिस्थितियों में लगातार संचालन के लिए तैयार किया गया है। इसके जरिए उन्नत समुद्री उपकरणों का परीक्षण, समुद्री संसाधनों की खोज और गहरे समुद्र से जुड़े वैज्ञानिक शोध को नई दिशा मिलेगी।

इस विशाल वैज्ञानिक परियोजना को तीन प्रमुख हिस्सों में विकसित किया गया है—मुख्य फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म, जहाज आधारित प्रयोगशालाएं और तट आधारित सपोर्ट सिस्टम। इसका मुख्य प्लेटफॉर्म सेमी-सबमर्सिबल ट्विन-हल डिजाइन पर आधारित है, जो इसे समुद्र की तेज लहरों और तूफानी हालात में भी स्थिर बनाए रखता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 10,000 मीटर तक की गहराई में वैज्ञानिक अनुसंधान और उपकरणों की टेस्टिंग करने में सक्षम होगा। यह क्षमता इसे दुनिया के सबसे उन्नत समुद्री रिसर्च प्लेटफॉर्म में शामिल करती है।

हालांकि यह परियोजना अभी पूरी तरह तैयार नहीं है और इसके 2030 तक पूर्ण रूप से ऑपरेशनल होने की उम्मीद है। भविष्य में यह गहरे समुद्र में खनन, तेल और गैस परियोजनाओं के परीक्षण और अन्य समुद्री गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण टेस्टिंग हब के रूप में काम करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म का डिजाइन बेहद अनूठा है, जिसमें सेमी-सबमर्सिबल ऑयल प्लेटफॉर्म और आधुनिक रिसर्च जहाजों की विशेषताओं को एक साथ जोड़ा गया है। इसे शंघाई जियाओ टोंग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है।

यह फ्लोटिंग आइलैंड समुद्र में रिसर्च जहाजों की तरह गतिशील है और जरूरत पड़ने पर किसी विशेष स्थान पर स्थिर होकर लंबे समय तक वैज्ञानिक प्रयोग कर सकता है। इसकी भारी भार वहन क्षमता और तूफानों का सामना करने की क्षमता इसे गहरे समुद्र में लंबे समय तक काम करने योग्य बनाती है।

इस प्रोजेक्ट की एक और अहम विशेषता इसका मल्टी-लेयर रिसर्च सिस्टम है, जो समुद्र के भीतर और जमीन पर मौजूद वैज्ञानिक संसाधनों को आपस में जोड़ता है। इससे वैज्ञानिकों को समुद्र के बीच बड़े पैमाने पर प्रयोग करने में आसानी होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से न केवल समुद्री अनुसंधान को गति मिलेगी, बल्कि तूफान पूर्वानुमान और तटीय आपदा प्रबंधन को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।



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