द देवरिया न्यूज़,ढाका : बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार एक ओर जहां भारत के साथ संबंधों को सामान्य और बेहतर बनाने के संकेत दे रही है, वहीं दूसरी ओर चीन के साथ उसके बढ़ते जुड़ाव ने क्षेत्रीय कूटनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश और चीन के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार और राजनीतिक संपर्कों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
विशेष रूप से बांग्लादेशी राजनीतिक नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों के लगातार चीन दौरे इस बदलाव का संकेत दे रहे हैं। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के निमंत्रण पर विभिन्न दलों के नेताओं का बीजिंग जाना इस बात को दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक स्तर पर संवाद तेज हुआ है।
हालांकि बांग्लादेश के कूटनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि देश की विदेश नीति किसी एक देश पर केंद्रित नहीं है। उनका तर्क है कि बांग्लादेश अपनी रणनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए बहु-आयामी संबंध बनाए रखना चाहता है। इसके बावजूद यह स्पष्ट है कि नई सरकार चीन के साथ रिश्तों को मजबूत करने में सक्रिय रुचि दिखा रही है।
शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और अन्य दलों के कई प्रतिनिधिमंडल चीन का दौरा कर चुके हैं। नवंबर 2024 में जमात-ए-इस्लामी का 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पहली बार चीन गया। वहीं, फरवरी में “बांग्लादेश-चीन मैत्री” समूह का 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी बीजिंग पहुंचा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल थे।
इसके बाद जून 2025 में BNP के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल चीन गया। हाल ही में, सरकार बनने के बाद भी यह सिलसिला जारी है। अप्रैल में BNP के नेतृत्व में 19 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल चीन गया, जहां “वन चाइना” नीति के प्रति समर्थन दोहराया गया और द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की बात कही गई।
प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के मंत्रियों और नेताओं द्वारा चीन को प्राथमिकता देना इस बात का संकेत है कि ढाका बीजिंग के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। इसी कड़ी में बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान 5 मई को चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं, जहां वे चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
इस यात्रा के दौरान आर्थिक सहयोग, विकास परियोजनाओं और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। साथ ही बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर चीन का समर्थन भी मांग सकता है और अपनी आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग की अपेक्षा कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन पहले ही बांग्लादेश में 40 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की योजना बना चुका है, जिसमें बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत कई परियोजनाएं शामिल हैं। ऐसे में चीन की बढ़ती सक्रियता केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश की नई सरकार एक संतुलित विदेश नीति अपनाने की कोशिश कर रही है, जिसमें भारत के साथ पारंपरिक संबंधों को बनाए रखते हुए चीन के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को भी बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, यह संतुलन भविष्य में क्षेत्रीय राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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