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भागवत का पाकिस्तानी रवैये पर कड़ा संदेश: “उसी भाषा में जवाब देना होगा जो वे समझें”: RSS प्रमुख मोहन भागवत

Published on: November 10, 2025
Bhagwat's Pakistani attitude
द देवरिया न्यूज़ : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बेंगलुरु में “संघ यात्रा के 100 साल: नए क्षितिज” कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी दी और कहा कि यदि पड़ोसी बार-बार उकसावे वाली हरकतें करता रहा तो भारत को उसी सख्ती से जवाब देना होगा जो उसे समझ आए। भागवत ने कहा कि भारत की मंशा शांतिपूर्ण रही है, परन्तु पाकिस्तान की जरूरतों और रवैये को बदलने के लिए निर्णायक कार्रवाई करना भी आवश्यक है।
भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान को बार-बार किए जाने वाले आक्रामक या उकसावे भरे कृत्यों के लिए प्रभावी और लगातार जवाब देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि “हमें उसी भाषा में बात करनी होगी जो वे समझते हैं” और कहा कि यदि यह नीति जारी रखी जाएगी तो एक दिन पाकिस्तान अपनी रणनीति बदलने को विवश होगा। उनका यह भी कहना था कि उद्देश्य युद्ध या तनाव फैलाना नहीं, बल्कि पड़ोसी देश को यह समझाना है कि सहयोग ही फायदा पहुंचाएगा—जिससे दोनों देशों की प्रगति संभव हो सके।
उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत युद्ध शुरू करने वाला देश नहीं है, लेकिन जो भी शांति भंग करेगा, उसे अनसजा नहीं छोड़ा जाएगा। भागवत ने अपने तर्क में इतिहास का भी स्मरण कराया और 1971 के युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि संघर्ष की कीमत बहुत भारी होती है। उनके अनुसार लगातार जवाबदेही और कार्रवाई अंततः पाकिस्तान के तरीकों में बदलाव ला सकती है और तब वह शांतिपूर्ण पड़ोसी बन सकता है।
भागवत के इस बयान में सुरक्षा-संदर्भीय सख्ती के साथ साथ यह संदेश भी निहित था कि शांति कायम करने के लिए एकतरफा रुख अपनाने से काम नहीं चलेगा—दोनों ओर संयम और स्पष्ट नीतिगत संदेश जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि भारत शांति चाहता है, पर यदि कोई लगातार शांति भंग करने की कोशिश करता है तो उसे रोकना भारत के हित में होगा।
इस अवसर पर भागवत ने यह भी रेखांकित किया कि भारत की तरक्की और समृद्धि में पड़ोसी देशों को भी भागीदार बनाने की संभावना है, बशर्ते वे शत्रुता और उकसावे की नीति छोड़ें। उनका मंचीय संदेश स्पष्ट था — डायलॉग और सहयोग प्रमुख लक्ष्य हैं, पर राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वाभाविक हितों की रक्षा के लिए निर्णायक प्रतिक्रिया देना भी आवश्यक और जायज़ है।
विशेषज्ञ और राजनयिक हलकों में ऐसे वक्तव्यों को अक्सर सामरिक संकेत के तौर पर देखा जाता है — यह संदेश न केवल पाकिस्तान के लिए बल्कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए भी भेजा गया माना जा सकता है।

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