Breaking News
ट्रेंडिंग न्यूज़देवरिया न्यूज़उत्तर प्रदेश न्यूज़राष्ट्रीय न्यूज़अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़राजनीतिक न्यूज़अपराधिक न्यूज़स्पोर्ट्स न्यूज़एंटरटेनमेंट न्यूज़बिज़नस न्यूज़टेक्नोलॉजी अपडेट लेटेस्ट गैजेट अपडेटमौसम

ईरान युद्ध में खुली अमेरिका की नौसैनिक ताकत की पोल? सिर्फ 3-5 एयरक्राफ्ट कैरियर ही ऑपरेशन के लिए तैयार

Published on: March 23, 2026
America is open to war with Iran
द  देवरिया न्यूज़,वॉशिंगटन : कागजों पर दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना रखने वाला अमेरिका इस समय अपनी युद्ध तैयारियों को लेकर सवालों के घेरे में है। रक्षा विशेषज्ञ ब्रैंडन जे. वीचर्ट के अनुसार, अमेरिका के पास भले ही 11 परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, लेकिन वास्तविकता में इनमें से केवल 3 से 5 ही युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरान के साथ जारी संघर्ष ने अमेरिकी नौसेना की तैयारियों और क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का प्रमुख शिपयार्ड न्यूपोर्ट न्यूज शिपबिल्डिंग, जो परमाणु ईंधन भरने और बड़े मरम्मत कार्यों के लिए जिम्मेदार है, औद्योगिक दबाव और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। इसी कारण कई एयरक्राफ्ट कैरियर लंबे समय से मरम्मत और ओवरहॉल के कारण सेवा से बाहर हैं।

ईरान युद्ध से पहले अमेरिका ने USS Gerald R. Ford को मिडिल ईस्ट भेजा था, लेकिन युद्ध शुरू होने के दो हफ्ते के भीतर ही इसमें आग लग गई। हादसे में करीब 200 नाविक घायल हुए और कैरियर को वापस लौटना पड़ा। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जहाज में तकनीकी खामियों के चलते सीवेज सिस्टम तक प्रभावित था, जिससे कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

वहीं USS John C. Stennis जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर पिछले कई वर्षों से मरम्मत के इंतजार में शिपयार्ड में खड़े हैं। इसकी मरम्मत में 14 महीने से अधिक की देरी हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के पास मरम्मत और रखरखाव के लिए पर्याप्त संसाधन और श्रमिक नहीं हैं, जिससे पूरी प्रणाली पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी नौसेना का बुनियादी ढांचा अब संकट के स्तर तक पहुंच चुका है। जहाजों की मरम्मत में इतनी देरी हो रही है कि कई बार उन्हें ठीक करने में उतना ही समय लग रहा है जितना उन्हें बनाने में लगा था। इसके चलते सीमित संख्या में उपलब्ध कैरियर्स पर काम का अत्यधिक बोझ पड़ रहा है, जिससे उनके खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है।

इसके अलावा, ईरान की एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलें (ASBM) अमेरिकी कैरियर्स के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एक भी कैरियर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होता है, तो अमेरिका के पास उसकी भरपाई के लिए पर्याप्त बैकअप नहीं है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका अब भी पुराने जहाजों जैसे USS Nimitz पर निर्भर है, जिन्हें पहले ही रिटायर किया जाना था। वहीं, नए फोर्ड क्लास कैरियर्स तकनीकी समस्याओं और देरी के कारण उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर में अपनी सैन्य ताकत फैलाने के कारण अमेरिका एक रणनीतिक दबाव में आ गया है, जहां वह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का बोझ भी ठीक से नहीं संभाल पा रहा। ऐसे में अमेरिकी नौसेना “ब्रेकिंग पॉइंट” यानी टूटने की कगार पर पहुंचती नजर आ रही है।


इसे भी पढ़ें : सीतापुर में तेज रफ्तार डंपर का कहर, बाइक सवार दो युवकों की मौत


Discover more from thedeoria.news : : Voice of rural India - ग्रामीण भारत की आवाज़

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply

error: Content is protected !!