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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस के सामने क्या विकल्प? समझिए पूरा मामला

Published on: June 11, 2026
Meenakshi Natarajan's nomination cancelled.

द  देवरिया न्यूज़,भोपाल। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका तब लगा जब उसके उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र जांच के दौरान रद्द कर दिया गया। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग कर रही है। अब सबकी नजर चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी है। यदि आयोग रिटर्निंग अधिकारी के निर्णय को सही ठहराता है, तो कांग्रेस के सामने आगे क्या विकल्प बचेंगे, यह बड़ा सवाल बन गया है।

क्या है पूरा मामला?

मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त हुई हैं। इनमें दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में थीं। भाजपा ने दो सीटों के लिए रजनीश अग्रवाल और तरुण चुघ को उम्मीदवार बनाया, जबकि कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा।

राजनीतिक समीकरण उस समय बदलते नजर आए जब भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को भी चुनाव मैदान में उतार दिया। इसके बाद तीसरी सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो गया। इसी बीच नामांकन पत्रों की जांच के दौरान मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया।

नामांकन क्यों हुआ खारिज?

रिटर्निंग अधिकारी के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र में एक लंबित न्यायिक मामले की जानकारी नहीं दी। बताया गया कि तेलंगाना में दर्ज एक निजी परिवाद मामले में अदालत ने 17 सितंबर 2025 को उन्हें समन जारी किया था और मामला अभी विचाराधीन है।

अधिकारियों का कहना है कि चूंकि मीनाक्षी नटराजन और उनके वकील इस मामले से अवगत थे तथा अदालत में जवाब भी दाखिल किया गया था, इसलिए नामांकन पत्र में इसकी जानकारी देना आवश्यक था। इस जानकारी को छिपाने के आधार पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया।

चुनाव आयोग के सामने पहुंची कांग्रेस

नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध किया। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक साजिश और लोकतंत्र के साथ अन्याय बताया। भोपाल और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन भी किए गए।

बुधवार को कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन बहाल करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, आयोग ने उनकी आपत्तियों को सुना और मामले पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

अगर चुनाव आयोग से राहत नहीं मिली तो?

यदि चुनाव आयोग रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को सही मानता है और नामांकन बहाल नहीं होता, तो कांग्रेस के पास अदालत का दरवाजा खटखटाने का विकल्प रहेगा।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने पहले से ही कानूनी तैयारी शुरू कर दी है। वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा की टीम इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जाने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कानूनी विशेषज्ञ अभिषेक मनु सिंघवी की टीम भी कानूनी विकल्पों का अध्ययन कर रही है।

चुनाव के बाद भी चुनौती दे सकती है कांग्रेस

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि चुनाव प्रक्रिया पूरी हो जाती है और भाजपा उम्मीदवार महेश केवट निर्वाचित हो जाते हैं, तब भी कांग्रेस के पास चुनाव याचिका दायर करने का अधिकार रहेगा।

कांग्रेस चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद संबंधित न्यायालय में चुनाव याचिका दाखिल कर चुनाव की वैधता को चुनौती दे सकती है। हालांकि इस तरह की कानूनी प्रक्रिया लंबी हो सकती है और अंतिम फैसला आने में काफी समय लग सकता है।

फिलहाल आयोग के फैसले का इंतजार

फिलहाल कांग्रेस की प्राथमिक कोशिश चुनाव आयोग से राहत प्राप्त करने की है। पार्टी को उम्मीद है कि आयोग मामले की समीक्षा कर नामांकन बहाल करने पर विचार करेगा। यदि ऐसा नहीं होता, तो कानूनी लड़ाई का रास्ता लगभग तय माना जा रहा है।

राज्यसभा चुनाव के इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है और अब चुनाव आयोग के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



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