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इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान बैकचैनल वार्ता की अटकलें, शर्तों पर अड़ा तेहरान

Published on: April 26, 2026
US-Iran backchannel in Islamabad
द  देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे संभावित शांति वार्ता को लेकर हलचल तेज है, हालांकि दोनों पक्ष इस पर सार्वजनिक तौर पर चुप्पी बनाए हुए हैं। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के पाकिस्तान दौरे के बाद इस्लामाबाद में मध्यस्थता की कोशिशों को लेकर “सावधानीपूर्ण आशावाद” का माहौल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वार्ता से जुड़ी जानकारी बेहद गोपनीय रखी जा रही है और तकनीकी पहलुओं को सार्वजनिक करने से दोनों पक्ष फिलहाल बच रहे हैं।
इतिहास देखें तो अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष बातचीत की खुली घोषणा बहुत कम ही हुई है। ज्यादातर मामलों में संपर्क बैकचैनल के जरिए ही हुआ है। पिछले महीने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत विफल होने का संकेत दिया था, वहीं ईरानी पक्ष ने भी वार्ता में प्रगति से इनकार किया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के अलावा मॉस्को समेत अन्य स्थानों पर भी अप्रत्यक्ष बातचीत के कई दौर हो चुके हैं। हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देश औपचारिक रूप से बातचीत की मेज पर आकर जटिल मुद्दों पर सहमति बना पाएंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, परमाणु कार्यक्रम, संवर्धित यूरेनियम का भंडार, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक नुकसान की भरपाई जैसे मुद्दे सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।
इस बीच, अमेरिका ने हाल ही में ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। दूसरी ओर, ईरान ने संकेत दिया है कि वह कूटनीति के साथ-साथ सैन्य विकल्पों के लिए भी तैयार है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामाबाद में संभावित दूसरे दौर की वार्ता पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अमेरिकी “नाकेबंदी” नहीं हटाई जाती, तब तक वह किसी भी नई बातचीत के लिए तैयार नहीं होगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने भी अमेरिकी अधिकारियों के साथ आमने-सामने वार्ता की संभावना से इनकार किया है।
सूत्रों का कहना है कि अमेरिका की ओर से प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद पहुंचने की संभावना है, लेकिन तेहरान की सख्त शर्तों के चलते बातचीत आगे बढ़ेगी या नहीं, इस पर संशय बना हुआ है। जानकारों का मानना है कि दोनों पक्षों के लिए यह स्थिति राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, जहां किसी भी तरह का झुकाव घरेलू स्तर पर कमजोरी के रूप में देखा जा सकता है।
कुल मिलाकर, हालात बेहद पेचीदा बने हुए हैं। जहां एक ओर बैकचैनल कूटनीति जारी है, वहीं दूसरी ओर सख्त बयानबाजी यह संकेत दे रही है कि अगर बातचीत विफल होती है, तो टकराव की आशंका भी बनी रहेगी।

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