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पूर्व CJI एनवी रमणा का बड़ा बयान: “सांविधानिक सिद्धांतों की रक्षा करने वाले जजों को भी झेलना पड़ा दबाव और उत्पीड़न”

Published on: November 3, 2025
Former CJI NV Ramana's elder
द देवरिया न्यूज़,अमरावती। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमणा ने कहा है कि जो न्यायिक अधिकारी और न्यायाधीश संविधान और कानून के शासन की रक्षा के लिए खड़े होते हैं, उन्हें अक्सर दबाव, धमकी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसे जजों के परिवारों को भी राजनीतिक संगठनों ने निशाना बनाया, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे सांविधानिक मूल्यों पर अडिग रहे। रमणा वीआईटी-एपी विश्वविद्यालय, अमरावती के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभवों का ज़िक्र करते हुए कहा कि न्यायपालिका पर दबाव डालने की कोशिशें लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती हैं।

“मेरे परिवार को भी निशाना बनाया गया”

पूर्व सीजेआई ने कहा,

“आप सभी जानते हैं कि मेरे परिवार को कैसे निशाना बनाया गया। उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। यह सब केवल मुझे दबाने और डराने के लिए किया गया।” उन्होंने यह भी कहा कि उस कठिन दौर में जो लोग किसानों के मुद्दे के पक्ष में बोले, उन्हें भी धमकाया गया और चुप कराने की कोशिश की गई। रमणा ने अप्रत्यक्ष रूप से आंध्र प्रदेश की तत्कालीन जगन मोहन रेड्डी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उस समय अमरावती को राज्य की एकमात्र राजधानी बनाए रखने की मांग कर रहे किसानों के आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हुईं, परंतु न्यायपालिका ने संविधान के सिद्धांतों का पालन करते हुए निष्पक्षता बरती।


“अमरावती के किसानों के साहस को सलाम”

रमणा ने अमरावती के किसानों की हिम्मत की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, “मैं अमरावती के किसानों के साहस को सलाम करता हूं। उन्होंने सरकार की ताकत का सामना किया और अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक संघर्ष किया। उनके धैर्य और विश्वास से मुझे प्रेरणा मिली।” उन्होंने कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन कानून का शासन और न्यायपालिका देश की स्थिरता का आधार बनी रहती है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे हमेशा नैतिकता, ईमानदारी और सत्य का साथ दें, क्योंकि यही लोकतंत्र की असली ताकत है।


“न्यायालय और वकील ही लोकतंत्र के प्रहरी”

पूर्व सीजेआई ने अपने संबोधन में कहा कि जब कई राजनेता किसी मुद्दे पर चुप रहना या हिचकिचाना पसंद करते हैं, तब न्यायालय और वकील ही लोकतंत्र की रीढ़ बनकर खड़े रहते हैं। “न्यायपालिका और अधिवक्ता समुदाय ने हर संकट में लोकतंत्र की रक्षा की है। आज भी अगर भारत में लोकतांत्रिक संस्थान जीवित हैं, तो उसमें अदालतों और वकीलों की बड़ी भूमिका है।” उन्होंने छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि सच्चाई और संवैधानिक कर्तव्यों से कभी समझौता न करें। “ईमानदारी कभी आसान रास्ता नहीं होती, लेकिन यही वह रास्ता है जो आपको सम्मान और सच्ची सफलता दिलाता है।”


तीन राजधानियों की नीति का संदर्भ

रमणा ने अपने भाषण में 2019 में आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई तीन राजधानी योजना का जिक्र भी किया।
इस योजना के तहत

  • विशाखापत्तनम को प्रशासनिक राजधानी,

  • अमरावती को विधायी राजधानी,

  • और कुर्नूल को न्यायिक राजधानी बनाया गया था।

इस फैसले के खिलाफ अमरावती के किसानों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था, जिनका समर्थन करने वालों को भी राजनीतिक प्रतिरोध झेलना पड़ा। उस समय एनवी रमणा भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर थे, और उन्होंने न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा के महत्व पर कई बार जोर दिया था।


“कानून का शासन ही लोकतंत्र की आत्मा है”

रमणा ने कहा कि कानून का शासन तभी जीवित रह सकता है, जब जनता को न्यायपालिका पर भरोसा बना रहे। “लोकतंत्र की आत्मा जनता के विश्वास से चलती है। अगर हम न्याय और ईमानदारी के साथ खड़े रहेंगे, तभी संविधान की आत्मा जीवित रहेगी।” उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का संस्थान बनना चाहिए। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने भीतर की “न्यायप्रियता” को कभी न खोएं।

इसे भी पढ़ें : भैंस को बचाने में महिला झुलसी — झोपड़ी में लगी आग से दर्दनाक मौत

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