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ईरान ने अमेरिका के खिलाफ बनाया सीक्रेट प्लान? मिसाइल-ड्रोन उत्पादन बढ़ाने और होर्मुज में हमले जारी रखने की तैयारी

Published on: August 19, 2026
Iran took action against the US.

द  देवरिया न्यूज़,तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के कट्टरपंथी धड़े ने अमेरिका के साथ लंबी लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में सेना पर नियंत्रण मजबूत करने, मिसाइल और ड्रोन का उत्पादन बढ़ाने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के लिए तय 60 दिन की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते की दिशा में फिलहाल कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।

कट्टरपंथी धड़े ने बदली रणनीति

वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, इंटरसेप्ट किए गए संचार और अन्य खुफिया सूचनाओं के आधार पर ईरान के कट्टरपंथी नेताओं ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। उनका उद्देश्य अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों पर सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, जून में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कोशिश शुरू होने के बाद ईरान के कुछ अधिकारियों ने कूटनीतिक समाधान के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास किया था। लेकिन कट्टरपंथी नेताओं ने इस दौरान अलग रणनीति अपनाते हुए संभावित बड़े संघर्ष की तैयारी पर जोर दिया।

IRGC का सेना पर बढ़ सकता है नियंत्रण

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान का शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) देश की नियमित सेना पर अपना प्रभाव और नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा युद्ध और पिछले घरेलू संघर्षों का अनुभव रखने वाले सैन्य अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करने, काउंटर-इंटेलिजेंस अभियान तेज करने तथा मिसाइल और ड्रोन उत्पादन बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाने की बात कही गई है।

होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ सकता है तनाव

ईरान की रणनीति में होर्मुज जलडमरूमध्य को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान यहां अपनी पकड़ मजबूत करने और जरूरत पड़ने पर समुद्री मार्ग पर दबाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही संघर्ष को लाल सागर तक फैलाने की रणनीति पर भी चर्चा होने का दावा किया गया है। ईरान के क्षेत्रीय सहयोगी समूहों के साथ संपर्क और बातचीत को भी इसी रणनीति का हिस्सा बताया गया है।

अमेरिका-ईरान समझौते की समय सीमा खत्म

अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी समझौते की दिशा में बातचीत के लिए तय 60 दिन की समय-सीमा 17 अगस्त को समाप्त हो गई। हालांकि, दोनों देशों के बीच अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका है। इसके बजाय दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में ईरान की सैन्य गतिविधियों और अमेरिका की प्रतिक्रिया पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

UN ने बातचीत फिर शुरू करने की अपील की

बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से बातचीत का रास्ता फिर अपनाने की अपील की है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि विवाद का स्थायी समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही संभव है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तेहरान और वॉशिंगटन फिर से बातचीत की मेज पर लौटेंगे या दोनों देशों के बीच तनाव एक नए सैन्य टकराव की ओर बढ़ेगा।


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