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बांग्लादेश में ‘शिखा अनिरबाण’ बुझाए जाने से बढ़ी चर्चाएं, सेना की दिशा को लेकर उठे सवाल

Published on: June 30, 2026
Shikha Anirban in Bangladesh

द  देवरिया न्यूज़,ढाका : बांग्लादेश की राजधानी ढाका छावनी में स्थित 1971 के मुक्ति संग्राम के शहीद सैनिकों की स्मृति में लगातार जलने वाली ‘शिखा अनिरबाण’ (Eternal Flame) को अस्थायी रूप से बुझा दिए जाने के बाद देश में राजनीतिक और सैन्य हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह स्मारक बांग्लादेश की स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए बलिदान और शौर्य का प्रमुख राष्ट्रीय प्रतीक माना जाता है।

1971 के शहीदों की याद का प्रतीक है ‘शिखा अनिरबाण’

‘शिखा अनिरबाण’ ढाका कैंटोनमेंट में स्थापित है और इसे 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में बनाया गया था। यह वर्षों से लगातार जलती रही है और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों व गणमान्य अतिथियों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित करने का प्रमुख स्थल रही है।

मीडिया रिपोर्ट: अगले आदेश तक बुझी रहेगी मशाल

नॉर्थ ईस्ट न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि 3 मई की सुबह से इस स्मारक की ज्योति अस्थायी रूप से बुझा दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह निर्णय सेना के दक्षिणी कमान (GE Army South) के निर्देश पर लिया गया और इसे “अगले आदेश तक” लागू रखने की बात कही गई है। हालांकि, इस कदम के पीछे कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है और बांग्लादेशी सेना की ओर से भी इस विषय पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

सेना प्रमुख को लेकर भी हो रही चर्चा

रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया है कि सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-ज़मां हाल ही में सऊदी अरब की हज यात्रा से लौटे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों और सेवानिवृत्त अधिकारियों की टिप्पणियों में उनके दाढ़ी रखने को लेकर भी चर्चा की गई है। हालांकि, यह उनके व्यक्तिगत निर्णय से जुड़ा विषय है और इसे सेना की नीतिगत दिशा से जोड़ने संबंधी कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

राजनीतिक हलकों में अलग-अलग व्याख्याएं

‘शिखा अनिरबाण’ को अस्थायी रूप से बुझाए जाने के बाद बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक दलों और विश्लेषकों ने देश की राजनीतिक एवं वैचारिक दिशा को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह कदम प्रतीकात्मक महत्व रख सकता है, जबकि अन्य इसे प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से भी जोड़कर देख रहे हैं।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और बांग्लादेश सरकार या सेना ने इस विषय पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

बांग्लादेश भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार तथा रणनीतिक सहयोग के मजबूत संबंध हैं। ऐसे में बांग्लादेश की सेना या राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया की नजर रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की स्थिति का आकलन आधिकारिक घोषणाओं और ठोस घटनाक्रमों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।


इसे भी पढ़ें : ‘इसी साल बांग्लादेश लौटूंगी’, पूर्व पीएम शेख हसीना का बड़ा ऐलान; अदालत के फैसले को बताया राजनीतिक


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