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काठमांडू में अमेरिका-चीन की बढ़ती सक्रियता, नेपाल बना नई कूटनीतिक ‘बैटलग्राउंड’

Published on: April 24, 2026
America and China in Kathmandu
द  देवरिया न्यूज़,काठमांडू : नेपाल की राजधानी काठमांडू इन दिनों वैश्विक कूटनीति का नया केंद्र बनती नजर आ रही है। अमेरिका के असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट समीर पॉल कपूर के हालिया दौरे ने इस बात को और स्पष्ट कर दिया है। उनका यह दौरा कई मायनों में खास रहा और इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को लेकर बड़े संकेत मिले हैं।

सबसे अहम बात यह रही कि समीर पॉल कपूर केवल नेपाल के दौरे पर आए, जबकि पहले अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारी अक्सर अपने दक्षिण एशियाई दौरे में श्रीलंका और बांग्लादेश को भी शामिल करते थे। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका अब नेपाल को अलग रणनीतिक महत्व दे रहा है।

दूसरी बड़ी बात यह रही कि कपूर के काठमांडू पहुंचते ही चीन के विदेश मंत्रालय के उप-निदेशक गाओ शिंग भी तत्काल वहां पहुंच गए। दोनों देशों के अधिकारी एक ही समय पर नेपाल में सक्रिय रहे और अलग-अलग नेपाली नेताओं से मुलाकात करते दिखे। इसे विशेषज्ञ अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

कपूर ने अपने दौरे के दौरान साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि चीन या कोई अन्य देश नेपाल पर वर्चस्व स्थापित करे। उन्होंने ‘संतुलित दृष्टिकोण’ की बात करते हुए नेपाल को स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति अपनाने की सलाह दी। हालांकि, उनके बयान में ‘अन्य देशों’ का जिक्र भारत की ओर इशारा माना जा रहा है।

अपने दौरे के दौरान कपूर ने नेपाल के कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की, जिनमें राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने, विदेश मंत्री शिशिर खनाल और वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले शामिल हैं। इन बैठकों में निवेश, व्यापार और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा हुई।

इसी बीच, चीनी अधिकारी गाओ शिंग ने भी नेपाली विदेश मंत्रालय पहुंचकर उच्च अधिकारियों से मुलाकात की और अमेरिका के साथ बढ़ते संबंधों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। नेपाली पत्रकारों के मुताबिक, काठमांडू में अमेरिका और चीन के बीच ‘कूटनीतिक मुकाबला’ एक बार फिर तेज हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की मौजूदा सरकार, खासकर प्रधानमंत्री बालेन शाह, दोनों महाशक्तियों के लिए अहम हो गए हैं। भारत के पूर्व राजनयिक एस.डी. मुनि का कहना है कि अमेरिका लंबे समय से नेपाल में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, खासकर तिब्बत के करीब होने के कारण। उनका मानना है कि अमेरिका नहीं चाहता कि नेपाल पूरी तरह भारत या चीन के प्रभाव में रहे।

मुनि के अनुसार, अमेरिका की नीति हमेशा से यह रही है कि वह नेपाल में बहु-ध्रुवीय प्रभाव बनाए रखना चाहता है, ताकि चीन को संतुलित किया जा सके। वहीं, चीन भी नेपाल को अपने प्रभाव क्षेत्र में बनाए रखने के लिए सक्रिय है।

कुल मिलाकर, नेपाल इस समय अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है, जहां आने वाले समय में कूटनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।



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