Gen-Z आंदोलन से मिली पहचान
सुदन गुरुंग एक गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनकी पहचान पिछले साल नेपाल में हुए Gen-Z आंदोलन के दौरान बनी। उस समय सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ ‘हामी नेपाल’ संगठन ने युवाओं को संगठित किया, जिसमें गुरुंग एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। उनकी आक्रामक भाषण शैली ने उन्हें युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय बना दिया। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर गोरखा निर्वाचन क्षेत्र-1 से चुनाव जीतकर संसद में जगह बनाई।
गृहमंत्री बनते ही विवादित फैसले
गृह मंत्री बनने के तुरंत बाद ही गुरुंग ने कई बड़े और विवादित फैसले लिए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी का आदेश दे दिया, जिससे राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। इसके बाद कई बड़े व्यवसायियों और नेताओं की गिरफ्तारी ने विवाद को और बढ़ा दिया।
इतना ही नहीं, उन्होंने सोशल मीडिया पर गिरफ्तारियों को लेकर ‘काउंटडाउन’ जैसे पोस्ट भी किए, जिसे लेकर उनकी काफी आलोचना हुई।
न्यायपालिका से टकराव
जब अदालत ने कुछ आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया, तो गुरुंग ने न्यायपालिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बयान दिया कि “लगता है न्यायाधीश मंत्रियों से ज्यादा शक्तिशाली हैं।” इस बयान ने सरकार और न्यायपालिका के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया।
संपत्ति और रिश्तों पर उठे सवाल
गुरुंग की संपत्ति को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हुआ। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, उनके परिवार के पास बड़ी मात्रा में जमीन, सोना और चांदी है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना हुई, जिस पर उनकी प्रतिक्रिया भी विवादित रही।
इसके अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार व्यवसायी दीपक भट्ट से उनके करीबी संबंध और कंपनियों में हिस्सेदारी को लेकर भी सवाल उठे। निवेश के स्रोत को लेकर संतोषजनक जवाब न दे पाने से उनकी स्थिति और कमजोर हो गई।
बालेन शाह सरकार को झटका
सुदन गुरुंग का इस्तीफा प्रधानमंत्री बालेन शाह के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पहली बार प्रधानमंत्री बने बालेन शाह पर पहले ही साफ-सुथरी छवि के साथ काम करने का दबाव है। ऐसे में उनके करीबी सहयोगी और कैबिनेट के प्रमुख चेहरे का विवादों में घिरकर इस्तीफा देना सरकार की साख पर असर डाल सकता है।
पेशे से इंजीनियर, राजनीति में तेज उभार
सुदन गुरुंग पेशे से सिविल इंजीनियर हैं और बालेन शाह के साथ उनका पुराना पेशेवर संबंध रहा है। दोनों ने राजनीति में आने से पहले कई परियोजनाओं पर साथ काम किया था। लेकिन राजनीति में उनका तेज उभार उतनी ही तेजी से विवादों में घिर गया। गुरुंग का यह इस्तीफा नेपाल की नई पीढ़ी की राजनीति के लिए भी एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जहां लोकप्रियता के साथ जवाबदेही और पारदर्शिता की कसौटी भी उतनी ही अहम है।