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अमेरिका के दबाव में रूसी तेल छोड़ेगा भारत? ट्रंप की चेतावनी, लेकिन पूरी रोक मुश्किल

Published on: February 10, 2026
Russian oil under US pressure
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील में रूसी तेल बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि भारत को रूस से तेल खरीदना बंद करना होगा और अमेरिका व वेनेजुएला से आयात बढ़ाना पड़ेगा। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर भारत ने रूसी तेल खरीदना जारी रखा, तो उस पर फिर से 25 फीसदी टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से अभी तक रूसी तेल आयात पूरी तरह रोकने का कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है।

जानकारों का मानना है कि भारत के लिए रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद करना बेहद मुश्किल है। हां, इसमें कुछ कमी जरूर आ सकती है, जिसके संकेत दिखने भी लगे हैं। ऑइलप्राइसडॉटकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के लिए रूसी तेल की खरीद रोकना व्यावहारिक नहीं है। वहीं रॉयटर्स के अनुसार, सरकारी रिफाइनरी कंपनियां इंडियन ऑइल और एचपीसीएल ने वेनेजुएला से तेल मंगवाना शुरू कर दिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी रूस से तेल खरीद रोकते हुए वेनेजुएला से एक बड़ा शिपमेंट लिया है।

रूसी तेल पर निर्भरता में आई कमी

भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें पहले लगभग एक-तिहाई हिस्सा रूस से आता था। नवंबर में ट्रंप द्वारा रूस के बड़े तेल निर्यातकों पर प्रतिबंध और भारत पर भारी टैरिफ की चेतावनी के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद में कुछ कटौती की है। अब अमेरिका चाहता है कि भारत इस आयात को पूरी तरह बंद कर दे। हालांकि रूस इस दबाव से खास परेशान नहीं दिख रहा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस भारत को तेल बेचने वाला अकेला देश नहीं है और भारत हमेशा से कई देशों से तेल खरीदता रहा है।

भारत के लिए रूसी तेल क्यों अहम

ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका का शेल ऑयल हल्का होता है, जबकि रूस का यूराल कच्चा तेल भारी और अधिक सल्फर वाला है, जो भारतीय रिफाइनरियों के लिए ज्यादा उपयुक्त है। अमेरिकी तेल के इस्तेमाल के लिए भारत को दूसरे ग्रेड के तेलों के साथ मिश्रण करना पड़ेगा, जिससे लागत बढ़ेगी।

कीमत भी एक बड़ा कारण है। रूसी तेल अन्य देशों के मुकाबले सस्ता है और उस पर लगातार डिस्काउंट मिल रहा है। पहले यह छूट 7–8 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 11 डॉलर तक पहुंच गई है। ऐसे में रूसी तेल को पूरी तरह छोड़ना भारत के लिए आर्थिक नुकसान का सौदा हो सकता है।

अमेरिकी तेल पड़ेगा महंगा

वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिकी कच्चा तेल भारतीय खरीदारों के लिए महंगा है, क्योंकि इसे अमेरिका के खाड़ी तट से भारत तक लाने में ज्यादा समय और खर्च लगता है। विश्लेषण एजेंसियों का कहना है कि इससे भारतीय रिफाइनरियों को प्रति बैरल करीब 7 डॉलर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिफाइनरियां तकनीकी रूप से रूसी तेल के बिना काम कर सकती हैं, लेकिन अचानक और पूरी तरह आयात रोकना न सिर्फ व्यावसायिक रूप से कठिन होगा, बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील फैसला साबित हो सकता है।

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