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भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र”, मोहन भागवत का बयान; राम मंदिर निर्माण में नेतृत्व और जनसमर्थन को बताया अहम

Published on: April 29, 2026
India is already a Hindu nation

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या में बने राम मंदिर को देश के सामूहिक प्रयास और नेतृत्व की प्रतिबद्धता का परिणाम बताया है। साथ ही उन्होंने “भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने” की मांगों पर कहा कि इसकी अलग से घोषणा की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही एक वास्तविकता है।

नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने यह बात कही। यह कार्यक्रम अयोध्या राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले लोगों के सम्मान के लिए आयोजित किया गया था। आरएसएस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, यह आयोजन रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा किया गया।

राम मंदिर को बताया सामूहिक प्रयास का परिणाम

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था के प्रयास से संभव नहीं था, बल्कि यह पूरे देश के लोगों की आस्था, सहयोग और समर्पण का नतीजा है। उन्होंने धार्मिक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया, वैसे ही किसी बड़े कार्य के लिए सामूहिक सहयोग जरूरी होता है।

उन्होंने कहा कि “भगवान की इच्छा के साथ-साथ लोगों का योगदान भी उतना ही जरूरी होता है। जब समाज एकजुट होकर प्रयास करता है, तभी ऐसे ऐतिहासिक कार्य संभव हो पाते हैं।”

नेतृत्व की भूमिका पर जोर

भागवत ने यह भी कहा कि राम मंदिर निर्माण में सत्ता में बैठे नेतृत्व की प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण रही। उनके अनुसार, केवल निर्णय लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसे पूरा करने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति और आधार भी जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि देश के हर वर्ग ने इस कार्य में अपना योगदान दिया।

“हिंदू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं”

हिंदू राष्ट्र को लेकर चल रही बहस पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, “जैसे सूरज पूर्व से उगता है और यह एक स्वाभाविक सत्य है, उसी तरह भारत भी एक हिंदू राष्ट्र है, जिसे अलग से घोषित करने की जरूरत नहीं है।”

उन्होंने यह भी कहा कि पहले इस विचार का मजाक उड़ाया जाता था, लेकिन अब कई लोग इसे स्वीकार करने लगे हैं।

आगे की जिम्मेदारी पर जोर

अपने संबोधन के अंत में भागवत ने कहा कि राम मंदिर निर्माण में जिन लोगों ने योगदान दिया, उन्होंने अपना कार्य पूरा कर लिया है। अब समाज के बाकी लोगों की जिम्मेदारी है कि वे देश और समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।


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