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कांग्रेस नेता उदित राज का बड़ा आरोप: “तेजस्वी को जिताया गया, बिहार चुनाव पहले से फिक्स था”

Published on: November 19, 2025
Congress leader Udit Raj's big allegation

द देवरिया न्यूज़/नई दिल्लीः बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर विपक्ष के आरोप थमने का नाम नहीं ले रहे। कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने अब इस मामले में एक और बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि बिहार के चुनाव नतीजे न केवल अप्रत्याशित हैं, बल्कि उन्हें “मैनिपुलेटेड” और “अनफेयर” कहा जा सकता है। उदित राज का कहना है कि राजद नेता तेजस्वी यादव वास्तव में जीते नहीं, बल्कि उन्हें जानबूझकर जिताया गया है ताकि चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों और विरोध को शांत किया जा सके।

उदित राज ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “साफ तौर पर यह मैंडेट मैनिपुलेटेड है। यह बिल्कुल निष्पक्ष चुनाव नहीं था। अखिलेश यादव पहले भी कह चुके हैं कि यह जीत नहीं बल्कि वोटों की डकैती है। सच यही है कि बिहार में वोटों की डकैती की गई है।”

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मतगणना के दिन शाम तक तेजस्वी यादव कई सीटों पर पीछे चल रहे थे, लेकिन बाद में परिणाम अचानक बदल गए। उनके अनुसार, “इन्होंने (चुनाव आयोग-बीजेपी) तेजस्वी यादव को जिता दिया। वह जीते नहीं हैं, उन्हें जिताया गया है। अगर ऐसा नहीं करते तो तेजस्वी यादव को भी हरा देते। यह किसी को भी हरा या जिता सकते हैं।”


बीजेपी पर संविधान बदलने की तैयारी का आरोप

उदित राज ने अपने आरोपों को और आगे बढ़ाते हुए दावा किया कि भाजपा भविष्य में संविधान संशोधन की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि 2027 तक “वन नेशन, वन इलेक्शन” लागू किया जा सकता है और 2029 के चुनाव में भाजपा 400 से अधिक सीटें पाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।

उदित राज के शब्दों में, “अब इनको नया तरीका मिल गया है। कई चीजें सर्वर (SIR) में हैं, कुछ ईवीएम में हैं। 2029 में यह संविधान को बदल देंगे। मैं गारंटी से कह रहा हूं कि ये संविधान खत्म करने जा रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा जिस तरह से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है, उससे यह स्पष्ट होता है कि लोकतांत्रिक ढांचा खतरे में है।


“भारत में चीन-रूस मॉडल लागू किया जा रहा है”

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भविष्य में भारत का चुनावी सिस्टम पूरी तरह से नियंत्रित हो सकता है। उन्होंने कहा, “बात बहुत आगे जा चुकी है। बिहार चुनाव पहले से फिक्स था। आगे होने वाले चुनावों में भी पहले से तय किया जाएगा कि किसे कितनी सीट देनी है। यह चीन या रूस का मॉडल है जिसे भारत में लागू किया जा रहा है।”

उदित राज की मानें तो विपक्षी नेताओं की जीत और हार अब जनता के वोट पर नहीं, बल्कि “पॉलिटिकल डिज़ाइन” पर निर्भर करती दिख रही है।

उनका आरोप है कि चुनाव आयोग और सरकार की मिलीभगत से चुनावों को इस तरह नियंत्रित किया जा रहा है कि लोकतंत्र महज एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाए।


तेजस्वी यादव की जीत पर सबसे बड़ा सवाल

राजद नेता तेजस्वी यादव के बारे में उदित राज का कहना है कि उनकी जीत जनादेश की देन नहीं, बल्कि “पॉलिटिकल मैनेजमेंट” का परिणाम है।
उन्होंने कहा, “तेजस्वी यादव को जिता दिया ताकि चुनाव में गड़बड़ी का शोर न मचे। अगर उन्हें भी हरा देते तो जनता का गुस्सा और अविश्वास और बढ़ जाता।”

हालांकि तेजस्वी यादव और राजद ने इन आरोपों पर कोई बयान नहीं दिया है।
चुनाव आयोग भी बार-बार यही कहता रहा है कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद हैं, और हर प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जाती है।


राजनीतिक माहौल और वोटर का भरोसा

बिहार चुनाव को लेकर जिस तरह विभिन्न दलों के नेता लगातार सवाल उठा रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि विपक्ष के बड़े हिस्से में चुनावी प्रक्रिया को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।

जहाँ भाजपा और एनडीए इसे जनता का “स्पष्ट जनादेश” बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस, राजद, समाजवादी पार्टी और कई अन्य विपक्षी नेता इसे “चुनावी हेरफेर”, “ईवीएम की गड़बड़ी” और “प्रक्रियागत धांधली” का नतीजा बता रहे हैं।


निष्कर्ष

उदित राज के आरोपों ने बिहार चुनाव को लेकर नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। बयान भले ही विवादित हों, लेकिन वे उस सवाल को दोबारा सामने लाते हैं, जो लंबे समय से बहस का विषय रहा है — क्या भारत में ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा पहले जैसा है?

आगामी दिनों में इस विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और भी सामने आएंगी, लेकिन यह तय है कि बिहार चुनाव नतीजे अब भी बहस के केंद्र में रहेंगे।


इसे भी पढ़ें : मानवता के खिलाफ अपराध में दोषी करार: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा

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