द देवरिया न्यूज़,पेरिस/नई दिल्ली : फ्रांस के वायुसेना प्रमुख जनरल जेरोम बेलेंजर ने राफेल F5 लड़ाकू विमान के विकास में हो रही देरी को लेकर चिंता जताई है। फ्रांसीसी सीनेट की एक समिति के समक्ष हुई बंद कमरे की बैठक में उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक सुरक्षा हालात को देखते हुए 2033 तक राफेल F5 का इंतजार करना व्यावहारिक नहीं है। उनके अनुसार, तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक संख्या में राफेल F4 विमान खरीदना बेहतर विकल्प होगा।
हाल ही में सार्वजनिक की गई बैठक की ट्रांसक्रिप्ट के अनुसार, जनरल बेलेंजर ने कहा कि राफेल F4 पहले से ही अत्यंत सक्षम मल्टीरोल लड़ाकू विमान है और वायुसेना की तत्काल परिचालन आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है।
भारत की 114 राफेल डील पर भी पड़ सकती है नजर
राफेल F5 में देरी भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारतीय वायुसेना के लिए प्रस्तावित 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर लंबे समय से चर्चा चल रही है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस संभावित सौदे में भविष्य के उन्नत F5 संस्करण के विमानों को भी शामिल किए जाने की संभावना जताई जाती रही है। हालांकि इस संबंध में भारत या फ्रांस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
क्या होंगे राफेल F5 की प्रमुख खूबियां?
राफेल F5 को मौजूदा संस्करणों की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक और घातक प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें कई नई तकनीकों को शामिल करने की योजना है, जिनमें प्रमुख हैं—
- अगली पीढ़ी की हाइपरसोनिक मिसाइलों को ले जाने की क्षमता।
- दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को निष्क्रिय करने के लिए उन्नत हथियार।
- समुद्री युद्ध (Anti-Ship Warfare) के लिए नई मिसाइल प्रणाली।
- अधिक थ्रस्ट वाला नया M88 T-REX टर्बोफैन इंजन, जो मौजूदा इंजन की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक शक्ति प्रदान करेगा।
- Manned-Unmanned Teaming (MUM-T) तकनीक, जिसके तहत राफेल मानव रहित कॉम्बैट ड्रोन के साथ संयुक्त अभियान चला सकेगा।
- भविष्य में स्टील्थ कॉम्बैट ड्रोन के साथ ऑपरेशन की क्षमता।
डिलीवरी में देरी क्यों?
फ्रांस ने जुलाई 2026 में 20 राफेल F5 विमानों का ऑर्डर दिया था, लेकिन अब उनकी डिलीवरी 2031-32 की बजाय 2033-34 तक खिसक गई है। इसी कारण फ्रांसीसी वायुसेना फिलहाल अधिक राफेल F4 खरीदने के पक्ष में नजर आ रही है।
डसॉल्ट पर बढ़ रहा ऑर्डर का दबाव
राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन के सामने इस समय भारी ऑर्डर बैकलॉग है। कंपनी को फ्रांस के अलावा भारत, मिस्र, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ग्रीस, क्रोएशिया, इंडोनेशिया और सर्बिया जैसे देशों को भी बड़ी संख्या में विमान उपलब्ध कराने हैं।
यदि भारत की प्रस्तावित 114 राफेल डील और अन्य संभावित अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर अंतिम रूप लेते हैं, तो कंपनी के सामने उत्पादन क्षमता बढ़ाने की बड़ी चुनौती होगी।
क्या समय पर मिल पाएंगे भारत को राफेल?
डसॉल्ट ने हाल के वर्षों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। कंपनी ने वार्षिक उत्पादन बढ़ाकर 36 विमानों तक पहुंचा दिया है और भविष्य में इसे 48 विमान प्रति वर्ष करने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन विस्तार समय पर पूरा होता है और आपूर्ति श्रृंखला में कोई बड़ी बाधा नहीं आती, तो भविष्य के बड़े ऑर्डरों की डिलीवरी तय समयसीमा के भीतर संभव हो सकती है। हालांकि अंतिम स्थिति नए रक्षा समझौतों और उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगी।
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