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सुप्रीम कोर्ट सख्त: डांस बार, ऑर्केस्ट्रा और स्पा में नाबालिगों के काम पर रोक की मांग पर केंद्र से जवाब तलब

Published on: May 26, 2026
Supreme Court strict dance bar

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : सुप्रीम Court ने ऑर्केस्ट्रा, डांस मंडलियों, मसाज पार्लर और स्पा में बच्चों एवं किशोरों को काम पर रखने के मामले को गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से जवाब मांगा है। अदालत ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र के श्रम मंत्रालय और विधि मंत्रालय को नोटिस जारी किया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने बाल अधिकार संगठन ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ (JRCA) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का की दलीलों पर विचार किया। याचिका में मांग की गई है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और किशोरों को ऑर्केस्ट्रा, डांस बार, नृत्य मंडलियों, नौटंकी, मसाज पार्लर, स्पा और सैलून जैसे स्थानों पर काम करने से पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।

‘10-11 साल की बच्चियां तक काम कर रहीं’

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का ने अदालत को बताया कि कई जगहों पर 10 और 11 वर्ष की नाबालिग लड़कियों को ऑर्केस्ट्रा और डांस बार में काम कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने स्पा और मसाज पार्लर में काम करने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष तय की है, लेकिन देशभर में एक समान और सख्त नियमों की जरूरत है।

पीठ ने मामले को बेहद संवेदनशील और गंभीर मानते हुए एनसीपीसीआर और एनएचआरसी को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिका में क्या मांग की गई?

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि केंद्र सरकार को बाल और किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 की धारा 4 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करने का निर्देश दिया जाए। इसके तहत इन क्षेत्रों को कानून की अनुसूची के भाग-क में शामिल करने की मांग की गई है, जहां किशोरों से काम कराना पूरी तरह प्रतिबंधित होता है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन स्थानों पर बच्चों को अक्सर अश्लील और शोषणकारी परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। इसलिए केवल विनियमन नहीं बल्कि पूर्ण प्रतिबंध जरूरी है।

तस्करी और यौन शोषण के आरोप

याचिका में दावा किया गया है कि ऑर्केस्ट्रा, डांस मंडलियों, स्पा और मसाज पार्लर जैसे कई क्षेत्र नाबालिग लड़कियों की तस्करी, यौन शोषण और जबरन मजदूरी के अड्डे बन चुके हैं। अधिवक्ता सोनाली जैन के माध्यम से दायर इस याचिका में कहा गया है कि कानून में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर बच्चों का शोषण किया जा रहा है।

याचिका के अनुसार वर्तमान कानून में मसाज पार्लर और स्पा को भाग-बी में रखा गया है, जहां 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों के काम करने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, बल्कि केवल नियमों के तहत काम की अनुमति दी जाती है। वहीं ऑर्केस्ट्रा और डांस मंडलियों जैसे कई क्षेत्र अभी तक किसी श्रेणी में शामिल ही नहीं किए गए हैं।

बचाव अभियानों में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

याचिका में मार्च 2025 से मई 2026 के बीच किए गए बचाव अभियानों का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार बिहार और पश्चिम बंगाल में ऑर्केस्ट्रा और नृत्य मंडलियों से 212 नाबालिगों को छुड़ाया गया। वहीं दिल्ली और राजस्थान में स्पा और मसाज पार्लर से 12 नाबालिगों को बचाया गया।

याचिका में कहा गया कि कई पीड़ित बच्चियों की उम्र केवल 12 वर्ष थी। उन्हें फिल्मों में काम, डांस ट्रेनिंग और बेहतर जीवन का झांसा देकर गरीब परिवारों से लाया गया। बाद में उन्हें 10 हजार से 50 हजार रुपये तक में बेच दिया गया और अश्लील कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया गया।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश और केंद्र सरकार के जवाब पर नजर बनी हुई है।


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