द देवरिया न्यूज़,अंकारा : होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और माल ढुलाई में देरी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। इसी बीच तुर्की ने लंबे समय से चर्चा में रहे ‘इस्तांबुल कनाल’ प्रोजेक्ट पर फिर से गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है।
बोस्फोरस के समानांतर बनेगा नया जलमार्ग
तुर्की की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत बोस्फोरस जलडमरूमध्य के समानांतर एक कृत्रिम नहर बनाई जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे जहाजों की आवाजाही का दबाव कम होगा और तुर्की को टोल फीस के रूप में बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पास में ही बोस्फोरस जैसा प्राकृतिक और अंतरराष्ट्रीय संधियों से सुरक्षित रास्ता मौजूद है, तो जहाज कृत्रिम नहर के लिए अतिरिक्त शुल्क क्यों चुकाएंगे?
होर्मुज संकट ने बढ़ाई चिंता
शिपिंग आंकड़ों के अनुसार, ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव बढ़ने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। संघर्ष से पहले यहां से प्रतिदिन लगभग 140 जहाज गुजरते थे, लेकिन संकट के दौरान कई बार यह संख्या घटकर सिर्फ तीन जहाज प्रतिदिन तक पहुंच गई। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और LNG सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है, इसलिए इसका असर वैश्विक बाजार पर साफ दिखाई दिया।
क्यों महत्वपूर्ण है बोस्फोरस?
तुर्की का बोस्फोरस और डार्डानेल्स जलमार्ग काला सागर और भूमध्य सागर को जोड़ता है। 1936 की मॉन्टो संधि के तहत तुर्की को इन जलमार्गों पर नियंत्रण मिला हुआ है। शांति काल में नागरिक जहाजों को यहां से गुजरने की स्वतंत्रता है, जबकि युद्धपोतों की आवाजाही पर कुछ सीमाएं लागू होती हैं। यही वजह है कि तुर्की अब तक इस मार्ग को पूरी तरह टोल आधारित मॉडल में नहीं बदल सका।
क्या है इस्तांबुल कनाल परियोजना?
इस्तांबुल कनाल प्रोजेक्ट के तहत शहर के यूरोपीय हिस्से में लगभग 45 किलोमीटर लंबी कृत्रिम नहर बनाने की योजना है। प्रस्तावित नहर की चौड़ाई करीब 275 मीटर और गहराई 21 मीटर रखी गई है, ताकि बड़े मालवाहक जहाज भी आसानी से गुजर सकें।
जहाजों को आकर्षित करना बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती जहाजों को टोल देकर इस नए मार्ग का इस्तेमाल करने के लिए तैयार करना होगी। यदि बोस्फोरस से मुफ्त या कम लागत में आवाजाही जारी रहती है, तो नई नहर को जहाजों को समय की बचत और निश्चित यात्रा जैसी अतिरिक्त सुविधाएं देनी होंगी। खासकर कीमती माल ढोने वाले जहाज तेज और तय समय वाले मार्ग के लिए अतिरिक्त पैसा खर्च करने को तैयार हो सकते हैं।
लागत को लेकर भी विवाद
इस्तांबुल कनाल परियोजना की लागत को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में इसकी लागत करीब 2 अरब डॉलर बताई गई है, जबकि कई विश्लेषकों का मानना है कि यह खर्च 15 अरब डॉलर से लेकर 65 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। तुर्की सरकार फिलहाल कह चुकी है कि परियोजना को पर्याप्त फंडिंग मिलने के बाद ही आगे बढ़ाया जाएगा।
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