द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : भारत ने अपनी “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत मालदीव को आर्थिक राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। भारत ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क के तहत मालदीव को लगभग ₹3,000 करोड़ की तत्काल निकासी की मंजूरी दी है। इस कदम से मालदीव को विदेशी मुद्रा की कमी से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, करेंसी स्वैप व्यवस्था का उद्देश्य जरूरत के समय साझेदार देशों को तरलता (लिक्विडिटी) उपलब्ध कराना है, ताकि वे बाजार से महंगे कर्ज लेने पर पूरी तरह निर्भर न रहें। इससे मालदीव को अपने भुगतान संतुलन (Balance of Payments) पर पड़ रहे दबाव को कम करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
आर्थिक दबाव से जूझ रहा मालदीव
हाल के समय में मालदीव की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने उसकी वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जताई है। पर्यटन, जो उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, उसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। साथ ही वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और आयात लागत में वृद्धि से भी दबाव बढ़ा है।
ऐसे हालात में भारत की यह मदद मालदीव सरकार को अपनी आर्थिक रणनीति को संतुलित करने और वित्तीय जोखिम कम करने में सहायक हो सकती है।
भारत-मालदीव साझेदारी को मजबूती
मालदीव के विदेश मंत्रालय ने भारत की इस सहायता का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के बीच मजबूत और भरोसेमंद साझेदारी का प्रतीक बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल आर्थिक सहयोग है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक रिश्तों को भी मजबूत करता है।
पहले भी करता रहा है मदद
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने मालदीव की आर्थिक मदद की हो। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कई बार वित्तीय सहायता, क्रेडिट लाइन और करेंसी स्वैप सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।
- 2024 में करीब 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा दी गई थी।
- 2025 में दो बार 50 मिलियन डॉलर के ब्याज-मुक्त ऋण की व्यवस्था में सहयोग किया गया।
- इसके अलावा बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी बड़ी क्रेडिट लाइन की घोषणा की गई थी।
संकट के समय ‘पहला सहयोगी’
भारत ने पहले भी मालदीव को आपदा और संकट के समय मदद पहुंचाई है। 2014 के जल संकट के दौरान भारत ने तुरंत पेयजल की आपूर्ति कर राहत दी थी। इसी तरह विभिन्न आर्थिक और विकास परियोजनाओं में भी भारत लगातार सहयोग करता रहा है।
कुल मिलाकर, भारत द्वारा दी गई यह नई वित्तीय सहायता मालदीव के लिए अल्पकालिक राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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