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अरावली पर्वतमाला पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी चिंता, करोड़ों साल पुरानी धरोहर पर मंडराया खतरा

Published on: December 23, 2025
Supreme Court on Aravalli ranges
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : राजपूतों की मौन प्रहरी रही अरावली पर्वतमाला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिसमें 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ों को ही अरावली पर्वत का हिस्सा मानने की बात कही गई है। इस फैसले के बाद अरावली के आसपास बसे शहरों में रहने वाले लोग इसे पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बता रहे हैं। हालांकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया है कि अरावली क्षेत्र में माइनिंग पर सख्ती पहले की तरह जारी रहेगी और 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र अब भी पूरी तरह संरक्षित है।
इतिहास की साक्षी रही अरावली
अरावली पर्वतमाला का इतिहास भारत के लिखित इतिहास से भी कहीं पुराना है। मध्यकालीन दौर में इसी पर्वत श्रृंखला के दुर्गम पहाड़ों ने महाराणा प्रताप जैसे योद्धाओं को मुगलों के खिलाफ छापामार युद्ध लड़ने के लिए सुरक्षित ठिकाने दिए। कुंभलगढ़ और चित्तौड़गढ़ जैसे ऐतिहासिक किले भी इसी पर्वतमाला का हिस्सा हैं। कभी राजपूतों की रक्षा करने वाली अरावली की पहाड़ियां आज खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं।
करोड़ों साल पुरानी धरोहर
अरावली पर्वत श्रृंखला को भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसका निर्माण प्रोटेरोजोइक युग में हुआ था, जो लगभग 250 से 350 करोड़ साल पहले का समय है। उस दौर में न तो भारत का वर्तमान स्वरूप था और न ही महाद्वीप आज की तरह अलग-अलग थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी प्राचीन पर्वत श्रृंखला की ऊंचाई और विस्तार को सीमित करने की बातें प्रकृति के संतुलन के लिए घातक हो सकती हैं।
670 किलोमीटर में फैली विशाल श्रृंखला
अरावली पर्वतमाला लगभग 670 किलोमीटर लंबी है और राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली तक फैली हुई है। यह केवल एक भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत की जलवायु और पर्यावरण संतुलन की रीढ़ मानी जाती है। अरावली थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकने में भी अहम भूमिका निभाती है।
ऊंचाई और भौगोलिक महत्व
अरावली की औसत ऊंचाई 300 से 900 मीटर के बीच है। इसकी सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर है, जो 1,722 मीटर ऊंची है और राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में स्थित है। वैज्ञानिक और पर्यावरणविद चेतावनी दे रहे हैं कि अरावली की संरचना से छेड़छाड़ का सीधा असर जल स्रोतों, जैव विविधता और क्षेत्रीय जलवायु पर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अरावली को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ सरकार संरक्षण की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ पर्यावरणविद और स्थानीय लोग इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर के भविष्य को लेकर गहरी चिंता जता रहे हैं।

इसे भी पढ़ें : देवरिया: बड़े नाले के निर्माण में लापरवाही, सुरक्षा इंतजाम न होने से राहगीरों की बढ़ी परेशानी


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