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सऊदी अरब की नई रक्षा रणनीति: तुर्की-पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी से अमेरिका क्यों चिंतित?

Published on: February 18, 2026
Saudi Arabia's new defense strategy

द देवरिया न्यूज़,रियाद : मध्य पूर्व की बदलती भू-राजनीति के बीच सऊदी अरब अपनी रक्षा खरीद नीति में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। हाल के महीनों में रियाद ने पाकिस्तान और तुर्की के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया है और फाइटर जेट खरीद को लेकर बातचीत की खबरें सामने आई हैं। यह रुख अमेरिका के लिए चिंता का कारण बन गया है, जो लंबे समय से सऊदी अरब का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता रहा है।

अमेरिका की चिंता क्या है?

‘मिडिल ईस्ट आई’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि यदि सऊदी अरब तुर्की या पाकिस्तान से लड़ाकू विमान खरीदता है तो इससे अमेरिकी हथियार बाजार में उसकी हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन सऊदी अरब को F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट बेचने के प्रयास में है। पिछले वर्ष व्हाइट हाउस में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने इस संभावित डील का संकेत दिया था।

पाकिस्तान से JF-17 पर विराम, तुर्की पर सस्पेंस

रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन की आपत्ति के बाद सऊदी अरब ने अमेरिका को आश्वस्त किया है कि वह पाकिस्तान से JF-17 थंडर जेट नहीं खरीदेगा। यह विमान चीन-पाकिस्तान के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया है।

हालांकि तुर्की के पांचवीं पीढ़ी के ‘कान’ (KAAN) फाइटर जेट को लेकर सऊदी की रुचि बरकरार है। अमेरिकी अधिकारियों को इस कार्यक्रम से पीछे हटने की कोई स्पष्ट गारंटी नहीं मिली है। अमेरिका सऊदी को F-15, यूरो टाइफून और F-35 जैसे विकल्पों के फायदे समझा रहा है, लेकिन रियाद फिलहाल सभी विकल्प खुले रखना चाहता है।

क्या सऊदी अमेरिका से दूर जा रहा है?

रियाद स्थित नेशनल सिक्योरिटी प्रोग्राम के डायरेक्टर जनरल हेशाम अलघनम ने कहा कि तुर्की के KAAN जेट में सऊदी की दिलचस्पी “विकल्पों के विस्तार” के तौर पर है, न कि अमेरिका से दूरी बनाने के संकेत के रूप में। उनका कहना है कि सऊदी अरब अभी भी अमेरिका को अपना प्रमुख सुरक्षा साझेदार मानता है और फिलहाल कोई भी देश अमेरिका की जगह नहीं ले सकता। हालांकि ट्रंप प्रशासन सऊदी की अन्य देशों से हथियार खरीद को प्रतिस्पर्धा और संभावित दूरी के रूप में देख सकता है।

दोनों से खरीद की रणनीति?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब संतुलन की नीति अपना सकता है—अमेरिका से F-35 और तुर्की से KAAN, दोनों में रुचि रखकर। इसके पीछे सामरिक कारणों के साथ-साथ क्षेत्रीय राजनीति भी जुड़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ बढ़ते प्रतिस्पर्धी संबंधों के मद्देनजर सऊदी अरब अपनी सैन्य क्षमता को बहुआयामी बनाना चाहता है। साथ ही, विभिन्न देशों से रक्षा खरीद कर वह रणनीतिक लचीलापन बनाए रखना चाहता है।

बदलते समीकरण

सऊदी अरब की यह नीति संकेत देती है कि वह एकमात्र आपूर्तिकर्ता पर निर्भर रहने के बजाय बहुध्रुवीय रक्षा संबंधों की ओर बढ़ रहा है। हालांकि अमेरिका के साथ उसके दशकों पुराने सुरक्षा संबंध अभी भी मजबूत हैं, लेकिन रियाद अब वैश्विक रक्षा बाजार में अपने विकल्पों का दायरा बढ़ाने से नहीं हिचक रहा।



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