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देवरिया के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा बने अयोध्या राम मंदिर के पहले CEO, ऑपरेशन सिंदूर में निभाई थी अहम भूमिका

Published on: September 3, 2026
Former Air Marshal from Deoria

द  देवरिया न्यूज़,देवरिया/अयोध्या। देवरिया के बनकटा ब्लॉक के भोपतपुर गांव से ताल्लुक रखने वाले पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का पहला चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया गया है। करीब 39 साल तक भारतीय वायुसेना में सेवाएं देने वाले मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर-2025 के दौरान पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभालने और उनके सैन्य अनुभव के लिए जाना जाता है। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।

30 अप्रैल 2026 को वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए जीतेंद्र मिश्रा को रिटायरमेंट के करीब 125 दिन बाद राम मंदिर के प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। भगवान राम में उनकी गहरी आस्था भी इस नियुक्ति को खास बनाती है।

39 साल की सेवा, 3 हजार घंटे से ज्यादा उड़ान

जीतेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को एयरफोर्स अकादमी से भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के लड़ाकू, परिवहन विमान और हेलिकॉप्टर उड़ाए। उनके पास 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है।

उन्होंने मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, एयरफोर्स टेस्ट पायलट स्कूल के इंस्ट्रक्टर और पठानकोट तथा बरेली जैसे महत्वपूर्ण एयरबेस की कमान संभाली। इसके अलावा एकीकृत रक्षा स्टाफ (IDS) में उप प्रमुख (ऑपरेशन) जैसे अहम पदों पर भी काम किया।

ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी वायु कमान की संभाली कमान

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जीतेंद्र मिश्रा पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख रहे। इसी भूमिका में भारतीय वायुसेना की पश्चिमी सीमा पर रणनीतिक और ऑपरेशनल गतिविधियों का नेतृत्व किया गया। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कई अनुभव साझा किए थे। उन्होंने बताया था कि अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की निगरानी और एयर डिफेंस प्रणाली को निशाना बनाने की रणनीति पर काम किया। उनके बयानों के मुताबिक, भारतीय S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता ने भी पाकिस्तान के लिए चुनौती पैदा की। हालांकि, ऑपरेशन से जुड़े कई सैन्य विवरण सार्वजनिक रूप से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए जा सकते।

‘लाइट बंद कर लीजिए’ की सलाह पर दिया था जवाब

ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा एक किस्सा बताते हुए मिश्रा ने कहा था कि युद्ध के दौरान उनके स्टाफ के एक अधिकारी ने उन्हें कार्यालय की लाइट बंद करने की सलाह दी थी। अधिकारी को आशंका थी कि दुश्मन उनके कार्यालय की लोकेशन ट्रैक कर सकता है। मिश्रा के अनुसार, उन्होंने जवाब दिया था कि भारतीय वायुसेना की तैयारियां मजबूत हैं और वह अपने कार्यालय से ही ऑपरेशन का नेतृत्व करेंगे। उनका यह अंदाज उनके आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।

314 किलोमीटर दूर लक्ष्य पर ‘शूट’ का आदेश

मिश्रा ने एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए बताया था कि ऑपरेशन के दौरान एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान की ओर करीब 314 किलोमीटर दूर एक महत्वपूर्ण लक्ष्य का पता लगाया। उनके मुताबिक, सूचना मिलने के बाद उन्होंने कंट्रोल रूम से संक्षिप्त आदेश दिया—“शूट”।

उनके बयान के अनुसार, इसके बाद S-400 प्रणाली से कार्रवाई की गई और पाकिस्तान की हवाई निगरानी व्यवस्था से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया। ऑपरेशन की वास्तविक क्षति और उससे जुड़े सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है।

फ्रांस में गरुड़ अभ्यास की टीम का किया नेतृत्व

जून 2010 में जीतेंद्र मिश्रा ने फ्रांस में आयोजित भारतीय वायुसेना के गरुड़ हवाई अभ्यास में भारतीय टीम का नेतृत्व किया था। वह पुणे में सुखोई-30 एमकेआई ऑपरेटिंग एयरबेस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर भी रह चुके हैं। उन्होंने रक्षा अकादमी पुणे, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, एयर यूनिवर्सिटी और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में प्रशिक्षण एवं शिक्षा हासिल की।

उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है। कारगिल युद्ध की शुरुआत के दौरान मिराज-2000 विमानों से लेजर गाइडेड बम के संचालन वाली टीम में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

देवरिया से खास जुड़ाव

जीतेंद्र मिश्रा मूल रूप से देवरिया के बनकटा ब्लॉक के भोपतपुर गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार वर्तमान में दिल्ली में रहता है। उनकी पत्नी सरिता सिंह एयरफोर्स वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (AFWWA) की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके एक बेटा और एक बेटी हैं।

उनके पिता नथुनी मिश्रा दिल्ली विश्वविद्यालय में कॉमर्स के प्रोफेसर रहे। छोटे भाई डॉ. देवेंद्र मिश्रा दिल्ली के एक मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक पद पर हैं, जबकि बहन डॉ. वंदना मिश्रा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रोफेसर हैं।

राम मंदिर में CEO की जिम्मेदारी क्यों अहम?

राम मंदिर में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, सुविधाओं का विस्तार और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसे कार्यों को देखते हुए CEO का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब चार दशक के सैन्य प्रशासन, नेतृत्व और ऑपरेशनल अनुभव वाले जीतेंद्र मिश्रा से मंदिर की व्यापक व्यवस्थाओं को पेशेवर ढंग से संचालित करने की उम्मीद की जा रही है।

राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से CEO पद के लिए जारी प्रक्रिया में वेतन और भत्ते को चयनित अधिकारी की योग्यता एवं अनुभव के आधार पर आपसी सहमति से तय करने की बात कही गई थी। नियुक्ति तीन वर्ष के अनुबंध पर होने की जानकारी दी गई थी। आवास, वाहन, सुरक्षा और अन्य सुविधाएं भी पद की जिम्मेदारियों के अनुरूप उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

देवरिया के एक गांव से निकलकर भारतीय वायुसेना के शीर्ष पदों तक पहुंचने के बाद अब जीतेंद्र मिश्रा को अयोध्या में राम मंदिर के प्रशासन की जिम्मेदारी मिलना उनके लंबे सार्वजनिक जीवन का एक नया अध्याय माना जा रहा है।


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