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होर्मुज में हमले के बाद भड़का तनाव, अमेरिका ने ईरान पर की एयर स्ट्राइक, जवाब में बहरीन-कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं

Published on: July 9, 2026
Enraged after the attack in Hormuz

द  देवरिया न्यूज़,तेहरान : पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बनी नाजुक शांति एक बार फिर खतरे में पड़ गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तीन तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इसके कुछ ही घंटों बाद ईरान ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर जवाबी कार्रवाई की। इस घटनाक्रम से पूरे क्षेत्र में एक बार फिर व्यापक संघर्ष की आशंका गहरा गई है।

होर्मुज में टैंकरों पर हमले के बाद अमेरिकी कार्रवाई

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में मंगलवार को तीन तेल टैंकरों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका ने इन हमलों के लिए ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को जिम्मेदार ठहराया, हालांकि ईरान ने टैंकर हमलों में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है।

अमेरिकी सेना ने केशम द्वीप और बंदर अब्बास सहित कई रणनीतिक ठिकानों पर एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी केंद्र, मिसाइल लॉन्च साइट, एंटी-शिप क्रूज मिसाइल ठिकानों, ड्रोन बेस और बंदरगाह सुविधाओं पर हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले

अमेरिकी हमलों के कुछ ही घंटे बाद ईरान ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन दागे। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी आक्रामकता का करारा जवाब दिया गया है। ईरानी सेना ने अपने बयान में कहा कि किसी भी कीमत पर होर्मुज जलडमरूमध्य के मामलों में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा और देश अपनी सुरक्षा तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।

ईरानी तेल निर्यात पर अमेरिकी सख्ती

सैन्य कार्रवाई के साथ ही अमेरिका ने जून में जारी वह सामान्य लाइसेंस भी रद्द कर दिया है, जिसके तहत ईरान को सीमित स्तर पर तेल निर्यात की अनुमति मिली थी। यह छूट युद्धविराम समझौते के हिस्से के रूप में दी गई थी, लेकिन अब इसे 17 जुलाई से पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से पहले से प्रतिबंधों का सामना कर रही ईरानी अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसका कच्चा तेल निर्यात और सीमित हो सकता है।

ईरान ने लगाया समझौते के उल्लंघन का आरोप

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने अमेरिकी हमलों और तेल निर्यात छूट खत्म करने के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने दोनों देशों के बीच हुए समझौते (MoU) का उल्लंघन किया है और कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाएगा।

युद्धविराम पर मंडराया संकट

अमेरिका और ईरान के बीच हाल में बना युद्धविराम अब गंभीर संकट में दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो पूरे पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ सीना अजादी के अनुसार, दोनों देशों के बीच स्थायी शांति समझौता होने तक इस तरह की सैन्य झड़पें जारी रहने और पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।

खाड़ी देशों की बढ़ी चिंता

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र के कई सहयोगी देशों ने अमेरिका और ईरान दोनों से संयम बरतने और युद्धविराम बनाए रखने की अपील की है। इन देशों को आशंका है कि यदि संघर्ष फिर से भड़कता है तो पूरे क्षेत्र की सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

नोट: इस समाचार में वर्णित सैन्य घटनाओं और दावों के संबंध में संबंधित पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।


इसे भी पढ़ें :  सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान में बढ़ी चिंता, पूर्व सैन्य अधिकारी ने जल सुरक्षा और कृषि पर जताई आशंका


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