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AMCA इंजन सौदे पर अड़चन, अमेरिकी कंपनी GE की बढ़ी कीमतों से भारत की चिंता बढ़ी

Published on: June 25, 2026
Hurdle in AMCA engine deal

द  देवरिया न्यूज़,वॉशिंगटन/नई दिल्ली। भारत के महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) कार्यक्रम को लेकर एक नई चुनौती सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) ने AMCA के लिए प्रस्तावित F414 इंजन की कीमत पहले के अनुमानों की तुलना में लगभग तीन गुना बढ़ा दी है। इससे भारत और GE के बीच चल रही बातचीत फिलहाल अटक गई है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत पहले ही तेजस लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए इंजन आपूर्ति में हुई देरी को लेकर अमेरिका से नाराजगी जता चुका है।

कीमत बढ़ने से बातचीत पर ब्रेक

रिपोर्ट के मुताबिक, AMCA कार्यक्रम के लिए F414 इंजन की प्रति यूनिट लागत पहले लगभग 70 से 80 करोड़ रुपये आंकी गई थी। हालांकि अब GE द्वारा प्रस्तावित नई कीमतें इससे कई गुना अधिक बताई जा रही हैं, जिसके कारण व्यावसायिक बातचीत में गतिरोध पैदा हो गया है।

सूत्रों के अनुसार तकनीकी स्तर पर अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन कीमत, तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer), लाइसेंस आधारित उत्पादन और रखरखाव सुविधाओं को लेकर अभी सहमति नहीं बन पाई है।

केवल इंजन खरीद का मामला नहीं

यह सौदा सिर्फ इंजन खरीद तक सीमित नहीं है। इसमें कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं, जैसे:
  • तकनीक हस्तांतरण (ToT)
  • भारत में लाइसेंस प्राप्त उत्पादन
  • मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधाएं
  • स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता
  • वारंटी और सपोर्ट
  • डिलीवरी शेड्यूल
  • भविष्य में कीमत संशोधन की शर्तें
इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा चल रही है।

AMCA, तेजस Mk-2 और TEDBF के लिए जरूरी है F414

AMCA कार्यक्रम के शुरुआती चरण में पांच फ्लाइंग प्रोटोटाइप के लिए लगभग 15 F414 इंजनों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा भविष्य में तेजस Mk-2 और TEDBF (Twin Engine Deck Based Fighter) कार्यक्रमों में भी इसी इंजन का उपयोग किया जाना प्रस्तावित है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भारत को F414 इंजन की 200 से अधिक यूनिटों की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि यह सौदा रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत में उत्पादन लाइन के लिए 6000 करोड़ रुपये की मांग

रिपोर्टों के अनुसार GE ने भारत में F414 इंजन की विशेष असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग लाइन स्थापित करने के लिए करीब 6000 करोड़ रुपये की मांग रखी है। यह उत्पादन सुविधा तेजस Mk-2, AMCA के शुरुआती उत्पादन बैच और TEDBF कार्यक्रम की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रस्तावित है। हालांकि इस लागत को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

भारतीय अधिकारियों ने विकल्पों पर शुरू की चर्चा

बढ़ती लागत को देखते हुए भारतीय अधिकारियों ने शुरुआती ऑर्डर की संख्या कम करने जैसे विकल्पों पर विचार शुरू किया है, ताकि तत्काल वित्तीय दबाव कम किया जा सके। हालांकि कीमतों को लेकर अंतिम सहमति अभी नहीं बन पाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस चरण पर इंजन बदलना भारत के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि AMCA और तेजस Mk-2 के डिजाइन में पहले से ही F414 इंजन को ध्यान में रखकर कई तकनीकी संरचनाएं विकसित की जा चुकी हैं।

इंजन बदलने पर बढ़ सकती है देरी

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यदि भारत किसी दूसरे इंजन विकल्प पर जाता है, तो पूरे विमान के साथ नए इंजन का इंटीग्रेशन, सॉफ्टवेयर बदलाव, उड़ान परीक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ सकती है।

एक सूत्र के अनुसार,

“यह किसी सामान्य पुर्जे को बदलने जैसा नहीं है। F414 इंजन पहले ही AMCA और तेजस Mk-2 के डिजाइन का हिस्सा बन चुका है। नया इंजन चुनने पर वर्षों की अतिरिक्त मेहनत और परीक्षण की आवश्यकता होगी।”

AMCA परियोजना भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

AMCA भारत की पहली स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी की स्टील्थ लड़ाकू विमान परियोजना है, जिसे एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को मजबूत करना और भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं को पूरा करना है।

भारत सरकार पहले ही इस परियोजना के प्रोटोटाइप विकास चरण के लिए 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दे चुकी है।

योजना के अनुसार:

  • पांच फ्लाइंग प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे।
  • चयनित औद्योगिक साझेदार को अनुबंध मिलने के 30 महीनों के भीतर पहली उड़ान पूरी करनी होगी।
  • प्रोटोटाइप लगभग 1800 परीक्षण उड़ानें भरेंगे।
  • इन परीक्षणों में स्टील्थ तकनीक, सेंसर, रडार, हथियार प्रणाली और इंजन प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा।

भविष्य में फ्रांस और ब्रिटेन भी विकल्प

AMCA के पहले संस्करण (Mk-1) के लिए F414 इंजन चुना गया है, लेकिन AMCA Mk-2 के लिए 110-120 kN श्रेणी के अधिक शक्तिशाली इंजन पर काम किया जा रहा है।

इस परियोजना के लिए फ्रांस की Safran और ब्रिटेन की Rolls-Royce प्रमुख दावेदार मानी जा रही हैं। भारत भविष्य में इंजन तकनीक के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भरता और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी दोनों विकल्पों पर विचार कर रहा है।

निष्कर्ष

AMCA भारत की रक्षा क्षमता और स्वदेशी सैन्य तकनीक के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है। ऐसे में इंजन सौदे में पैदा हुआ यह गतिरोध कार्यक्रम की समय-सीमा और लागत दोनों को प्रभावित कर सकता है। आने वाले महीनों में भारत और GE के बीच होने वाली बातचीत इस परियोजना की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।


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