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कुशवाहा की चुप्पी और विधायकों की नाराज़गी, RLM के भविष्य पर सवाल

Published on: December 26, 2025
Kushwaha's silence and MLAs
द देवरिया न्यूज़,पटना : राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर आयोजित ‘लिट्टी-चोखा भोज’ से जहां संगठन में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश थी, वहीं इस आयोजन ने उल्टा सियासी हलचल तेज कर दी। पार्टी के तीन प्रमुख विधायक—माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह—पटना में मौजूद होने के बावजूद इस भोज में शामिल नहीं हुए। इसके बजाय तीनों नेता दिल्ली पहुंचे और भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की। इस घटनाक्रम के बाद RLM में टूट की आशंकाएं तेज हो गई हैं।

मंत्री पद और परिवारवाद को लेकर बढ़ी नाराजगी

पार्टी सूत्रों के अनुसार असंतोष की सबसे बड़ी वजह मंत्री पद और परिवारवाद को लेकर है। विधायक रामेश्वर महतो को उम्मीद थी कि उपेंद्र कुशवाहा उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दिलाएंगे, लेकिन कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनवाया और पत्नी को टिकट देकर विधायक। इस फैसले से पार्टी के कई वरिष्ठ नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। रामेश्वर महतो ने हाल ही में सोशल मीडिया पर भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए नेतृत्व की नीयत और नीतियों पर सवाल उठाए थे।

भाजपा नेताओं से मुलाकात के सियासी मायने

भाजपा की ओर से इन मुलाकातों को भले ही औपचारिक बताया जा रहा हो, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे गंभीर संकेत मान रहे हैं। एक साथ तीन विधायकों का दिल्ली जाना और पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रम का बहिष्कार करना महज संयोग नहीं माना जा रहा। सूत्रों का दावा है कि तीनों विधायक अब किसी बड़े फैसले की ओर बढ़ रहे हैं और सामूहिक रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

कुशवाहा की चुप्पी, भविष्य पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक न तो उपेंद्र कुशवाहा की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है और न ही नाराज विधायकों ने खुलकर पत्ते खोले हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि अगर ये तीनों विधायक पार्टी से अलग होते हैं, तो RLM के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। सवाल यह भी है कि क्या ये नेता किसी नए राजनीतिक मंच की तलाश करेंगे या भाजपा के साथ कदम मिलाएंगे—इस पर अगले कुछ दिनों में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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