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भारतीय पत्रकार आनंद आर के और सुपर्णा शर्मा को पुलित्जर पुरस्कार, साइबर क्राइम रिपोर्टिंग के लिए सम्मान

Published on: May 6, 2026
Indian journalists Anand RK and Suparna
द  देवरिया न्यूज़,न्यूयॉर्क : भारतीय पत्रकार आनंद आर के और सुपर्णा शर्मा को डिजिटल निगरानी और साइबर धोखाधड़ी पर उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के लिए प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। सोमवार को घोषित इस पुरस्कार में दोनों को ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग एंड कमेंट्री’ श्रेणी में सम्मान मिला। उन्होंने यह पुरस्कार ब्लूमबर्ग की पत्रकार नताली ओबिको पियर्सन के साथ साझा किया।
पुलित्जर पुरस्कार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ‘ट्रैप्ड’ शीर्षक से प्रकाशित इस रिपोर्ट में भारत की एक न्यूरोलॉजिस्ट की कहानी को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है, जिन्हें साइबर ठगों ने कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में फंसा दिया था। इस रिपोर्ट में टेक्स्ट और विजुअल्स के संयोजन के माध्यम से साइबर अपराध और डिजिटल निगरानी के बढ़ते खतरे को प्रभावी ढंग से उजागर किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खोजी पत्रकारिता आज के डिजिटल युग में बेहद महत्वपूर्ण है, जहां साइबर अपराध लगातार जटिल और वैश्विक रूप ले रहा है। यह रिपोर्ट न केवल एक व्यक्तिगत घटना को सामने लाती है, बल्कि व्यापक स्तर पर साइबर सुरक्षा की चुनौतियों को भी रेखांकित करती है।
पुलित्जर पुरस्कार को पत्रकारिता, साहित्य और संगीत के क्षेत्र में दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है। इसकी स्थापना 1917 में हंगेरियन-अमेरिकी पत्रकार और प्रकाशक जोसेफ पुलित्जर की वसीयत के आधार पर की गई थी। कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा संचालित यह पुरस्कार कुल 21 श्रेणियों में प्रदान किया जाता है।
विजेताओं का चयन पुलित्जर प्राइज बोर्ड द्वारा किया जाता है, जो एक स्वतंत्र संस्था है। यह बोर्ड विभिन्न प्रविष्टियों का गहन मूल्यांकन कर उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करता है। पुरस्कार स्वरूप विजेताओं को प्रमाणपत्र के साथ 15,000 डॉलर की नकद राशि प्रदान की जाती है।
भारतीय मूल के कई प्रतिष्ठित नाम पहले भी पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। गोविंद बिहारी लाल 1937 में यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय थे। इसके बाद झुंपा लाहिड़ी (2000), सिद्धार्थ मुखर्जी (2011) और फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी (मरणोपरांत) जैसे नाम इस सूची में शामिल हैं।
आनंद आर के और सुपर्णा शर्मा की यह उपलब्धि भारतीय पत्रकारिता के लिए गर्व का क्षण मानी जा रही है, जो वैश्विक स्तर पर उसकी सशक्त उपस्थिति को दर्शाती है।

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