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राऊज एवेन्यू कोर्ट में सोनिया गांधी मामले की सुनवाई, लिखित दलीलों के लिए एक सप्ताह का समय

Published on: April 19, 2026
Sonia Gandhi in Rouse Avenue Court
द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली स्थित राऊज एवेन्यू कोर्ट में शनिवार को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से जुड़े एक मामले में सुनवाई हुई। यह मामला उस संशोधन याचिका से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले उनका नाम मतदाता सूची में शामिल कराया गया था। इस मामले में शिकायतकर्ता पक्ष ने अपनी मौखिक दलीलें पूरी कर दी हैं, जिसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों को एक सप्ताह के भीतर अपनी-अपनी लिखित दलीलें प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान सोनिया गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें अगली तारीख पर कुछ अतिरिक्त दलीलें रखने की अनुमति दी जाए। अदालत ने इस अनुरोध पर सहमति जताते हुए मामले की अगली सुनवाई 16 मई 2026 को निर्धारित की है। इस तारीख पर दोनों पक्षों की लिखित दलीलों के साथ आगे की बहस होने की संभावना है।
शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने चुनाव आयोग से प्राप्त कुछ दस्तावेजों को अदालत के रिकॉर्ड में शामिल करने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने तुरंत स्वीकार कर लिया। त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनका उद्देश्य सीधे मुकदमे की सुनवाई शुरू कराना नहीं है, बल्कि इस मामले में पुलिस जांच के आदेश की मांग करना है। उनका कहना है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह मामला जांच के योग्य है।
शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत में दलील दी कि वर्ष 1980 की मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम शामिल किया गया था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को प्राप्त हुई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि नागरिकता मिलने से पहले उनका नाम मतदाता सूची में कैसे जोड़ा गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आशंका जताई कि संभवतः यह कार्य गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किया गया हो सकता है, जो कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।
इसके साथ ही याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि 1980 में नाम जोड़ा गया था तो 1982 में इसे हटाया क्यों गया और फिर 1983 में नागरिकता मिलने के बाद किस आधार पर इसे पुनः शामिल किया गया। शिकायतकर्ता का तर्क है कि इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
हालांकि, इससे पहले की सुनवाई में सोनिया गांधी की ओर से दाखिल जवाब में इस याचिका को पूरी तरह निराधार, राजनीतिक रूप से प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया गया था। उनके वकीलों ने कहा था कि यह याचिका तथ्यों पर आधारित नहीं है और इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ हासिल करना है।
गौरतलब है कि इससे पहले मजिस्ट्रेट अदालत ने सितंबर माह में इस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच कराने की मांग की गई थी। अब संशोधन याचिका के माध्यम से इस मामले को फिर से उठाया गया है।
फिलहाल अदालत ने दोनों पक्षों को लिखित दलीलें प्रस्तुत करने का समय दिया है, जिसके बाद यह तय होगा कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी। 16 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है।

इसे भी पढ़ें : महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का बड़ा बयान—‘विरोध करने वालों को चुकानी पड़ेगी कीमत’


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