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मुजफ्फरपुर: मतदाता सूची कार्य में लगाए गए 16 शिक्षक, स्कूल में पढ़ाई ठप, 650 छात्राएं बेहाल

Published on: July 13, 2025
Muzaffarpur matdata soochi karya

मुजफ्फरपुर जिले के मैनाटांड़ प्रखंड में स्थित सरदार मंगल सिंह प्रोजेक्ट उच्च विद्यालय में इन दिनों शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। वजह है—शिक्षकों की भारी संख्या को मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य (वोटर लिस्ट रिवीजन) में लगा देना। कुल 19 में से 16 शिक्षक इस कार्य में तैनात कर दिए गए हैं, जिससे विद्यालय में केवल तीन शिक्षक शेष रह गए हैं।


पढ़ाई पर पड़ा सीधा असर

विद्यालय में करीब 650 छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन केवल तीन शिक्षकों के भरोसे सारी कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इससे न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि छात्राओं का भविष्य भी खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।

छात्राओं ने शिकायत करते हुए कहा कि:

“हम स्कूल तो आ रहे हैं, लेकिन पढ़ाई नहीं हो रही। अधिकांश क्लास खाली जा रही है, और कुछ विषय पढ़ाए ही नहीं जा रहे।”


प्रभारी प्रधानाध्यापक ने जताई चिंता

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक ने बताया कि:

“बड़ी संख्या में शिक्षक चुनाव कार्यों में लगाए गए हैं। तीन शिक्षकों से इतने बड़े विद्यालय की व्यवस्था संभालना मुश्किल है। बार-बार प्रशासन को जानकारी दी गई है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ।”


प्रशासन की चुनौती: चुनाव बनाम शिक्षा

प्रशासनिक स्तर पर मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य एक संवैधानिक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। लेकिन इसका असर जब शिक्षा पर पड़ता है, तब यह सवाल खड़ा करता है कि क्या शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में अत्यधिक लगाना उचित है?

शिक्षा विभाग पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि शिक्षकों की तैनाती गैर-शैक्षणिक कार्यों में सीमित की जानी चाहिए, विशेष रूप से तब जब विद्यालयों में शिक्षकों की पहले से ही भारी कमी हो।


समस्या केवल एक स्कूल की नहीं

मैनाटांड़ प्रखंड के अन्य कई विद्यालयों में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां कई शिक्षकों को चुनावी कार्य में लगा दिया गया है। इससे शिक्षा व्यवस्था बाधित हो रही है और छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है।


निष्कर्ष:

एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की नियुक्ति शैक्षणिक कार्यों के बजाय प्रशासनिक कार्यों में हो रही है। यह विरोधाभास न केवल नीतियों पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि बच्चों के अधिकारों और भविष्य पर भी चोट करता है।

अब आवश्यकता इस बात की है कि प्रशासन एक संतुलित नीति अपनाए, जिससे संवैधानिक कार्य भी प्रभावित न हों और बच्चों की पढ़ाई भी न रुके।

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