‘द हिंदू’ को दिए एक इंटरव्यू में बाकेई ने भारत-ईरान संबंधों, होर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिका के साथ चल रही बातचीत समेत कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संबंध बेहद गहरे हैं।
भारत के साथ संबंधों पर बोलते हुए बाकेई ने कहा, “हमें ईरान-भारत संबंधों के इतिहास पर गर्व है। दोनों देश गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सदस्य रहे हैं और दोनों देशों के नेता इन रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने कहा कि ईरान भारत के लोगों के साथ विशेष निकटता महसूस करता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों से शुल्क वसूले जाने की अटकलों पर भी ईरानी प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि ईरान किसी भी देश से कोई शुल्क नहीं ले रहा है। बाकेई के मुताबिक, “हम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक तटीय देश के रूप में केवल ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिनसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा की जा सके।”
इस दौरान बाकेई ने अमेरिका पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ईरान इस समय अमेरिका की ओर से मिले नए प्रस्ताव का अध्ययन कर रहा है और समीक्षा पूरी होने के बाद पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए जवाब दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि जब ईरान कूटनीतिक बातचीत में शामिल था, उसी दौरान उस पर हमला किया गया।
ईरानी प्रवक्ता के इस बयान को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब पश्चिम एशिया में तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और अमेरिका-ईरान संबंधों में अविश्वास कायम है।