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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीर पंजाल पर विवाद: बयान से बढ़ा सियासी घमासान

Published on: February 8, 2026
Pir Panjal in Jammu and Kashmir Assembly

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली/श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीर पंजाल क्षेत्र के अस्तित्व को लेकर की गई एक टिप्पणी ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा विधायक और नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा के बयान के बाद सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। विवाद इतना बढ़ गया कि विधानसभा में हंगामा हुआ और माफी की मांग तक की नौबत आ गई।

दरअसल, विवाद पीर पंजाल और चेनाब घाटी को अलग-अलग क्षेत्रीय पहचान देने को लेकर है। राजनीतिक तौर पर राजौरी-पुंछ जिलों को पीर पंजाल क्षेत्र और रामबन-डोडा-किश्तवाड़ को चेनाब रीजन कहा जाता है। इसी संदर्भ में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU) को पीर पंजाल क्षेत्र में स्थापित करने की मांग पर भाजपा नेता सुनील शर्मा ने कहा, “मुझे नहीं पता कि यह पीर पंजाल खित्ता कौन सा है।” इसी बयान पर विपक्षी दलों ने कड़ा ऐतराज जताया।

क्या है पीर पंजाल क्षेत्र

पीर पंजाल पश्चिमी हिमालय की एक प्रमुख पर्वतमाला है, जो हिमाचल प्रदेश से लेकर जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) तक फैली हुई है। ब्यास, रावी, झेलम और चेनाब जैसी अहम नदियों का उद्गम भी इसी क्षेत्र से जुड़ा है। ऐतिहासिक रूप से इसका उल्लेख 12वीं सदी के ग्रंथ राजतरंगिणी में मिलता है।

विवाद की जड़ कहां

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद तब गहराया जब पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने राजौरी-पुंछ और चेनाब घाटी के जिलों को मिलाकर एक अलग प्रशासनिक डिवीजन बनाने की मांग की। उन्होंने दूरस्थ इलाकों, पहाड़ी भूभाग और विकास की कमी का हवाला दिया था। भाजपा ने इस मांग को क्षेत्रवाद बढ़ाने की साजिश बताया।

स्थानीय नेताओं का विरोध

सुनील शर्मा के बयान के बाद राजौरी और पुंछ से जुड़े विधायकों ने तीखा विरोध किया। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और वन मंत्री जावेद राणा ने बयान को जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया और माफी की मांग की। निर्दलीय विधायक मुजफ्फर इकबाल खान ने कहा कि यह केवल पीर पंजाल ही नहीं, बल्कि चेनाब घाटी के लोगों के बलिदान का भी अपमान है।

भाजपा का रुख

भाजपा का कहना है कि पूरा जम्मू-कश्मीर एक इकाई है और क्षेत्रीय पहचान के नाम पर लोगों को बांटना गलत है। वहीं, सत्तारूढ़ दलों का आरोप है कि बयान से सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। फिलहाल, पीर पंजाल को लेकर यह सियासी विवाद थमने के बजाय और गहराता दिख रहा है।



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