द देवरिया न्यूज़,मॉस्को : यूक्रेन युद्ध के बीच रूस अपनी नौसैनिक ताकत को और मजबूत करने की तैयारी में जुटा है। रूसी नौसेना ने पुष्टि की है कि परमाणु ऊर्जा से संचालित उसके सबसे शक्तिशाली युद्धपोत ‘एडमिरल नाखिमोव’ (Admiral Nakhimov) को वर्ष 2026 में आधुनिकीकरण के बाद फिर से सेवा में शामिल किया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार, इस युद्धपोत पर तीन Ka-31 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग (AEW) हेलिकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं, जिससे इसकी निगरानी और वायु रक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
परमाणु ऊर्जा से चलता है युद्धपोत
एडमिरल नाखिमोव रूस के किरोव श्रेणी (Kirov-class) के परमाणु ऊर्जा से संचालित युद्धपोतों में शामिल है। परमाणु रिएक्टर से लैस होने के कारण यह लंबे समय तक बिना ईंधन भरे समुद्र में संचालन करने में सक्षम है। इसकी उच्च गति और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली सतही युद्धपोतों में शामिल करती है।
अत्याधुनिक मिसाइलों से होगा लैस
रिपोर्टों के अनुसार, आधुनिकीकरण के बाद युद्धपोत पर आधुनिक हथियारों का बड़ा जखीरा मौजूद होगा। इसमें लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली, विभिन्न प्रकार की क्रूज मिसाइलें और हाइपरसोनिक हथियार शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि जहाज पर S-400 आधारित लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली के लिए बड़ी संख्या में वर्टिकल लॉन्च सेल लगाए गए हैं। इसके अलावा जिरकॉन (Zircon) हाइपरसोनिक मिसाइल, कलिब्र और अन्य आधुनिक मिसाइल प्रणालियां भी इसकी मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाएंगी।
Ka-31 हेलिकॉप्टर बढ़ाएंगे निगरानी क्षमता
मिलिट्री वॉच मैगजीन की रिपोर्ट के अनुसार, रूस एडमिरल नाखिमोव पर तीन Ka-31 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) हेलिकॉप्टर तैनात करने की योजना बना रहा है। इन हेलिकॉप्टरों को समुद्री अभियानों के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया है। इनमें लगा फोल्डिंग रडार सिस्टम हवा में उड़ते हुए लंबी दूरी तक दुश्मन के लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और अन्य हवाई लक्ष्यों का पता लगाने में सक्षम माना जाता है।
S-400 और जिरकॉन को मिलेगा बेहतर लक्ष्य निर्धारण
Ka-31 हेलिकॉप्टरों से प्राप्त रडार जानकारी सीधे युद्धपोत के कमांड सेंटर तक पहुंचाई जा सकती है। इससे जहाज पर तैनात वायु रक्षा प्रणाली और लंबी दूरी की मिसाइलों को लक्ष्य की पहले से पहचान करने में मदद मिलेगी। रिपोर्टों के अनुसार, यह हेलिकॉप्टर लगभग 150 किलोमीटर की दूरी से लड़ाकू विमान और क्रूज मिसाइलों का पता लगा सकता है, जबकि बड़े हवाई लक्ष्यों को इससे भी अधिक दूरी से ट्रैक करने में सक्षम बताया जाता है।
रूसी नौसेना की क्षमता होगी मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि एडमिरल नाखिमोव की वापसी से रूसी नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। लंबी दूरी की मिसाइलों, आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली और एयरबोर्न रडार हेलिकॉप्टरों का संयोजन इसे समुद्री अभियानों के दौरान अधिक प्रभावी बना सकता है।
हालांकि, युद्धपोत पर तैनात किए जाने वाले सभी हथियारों और हेलिकॉप्टरों के अंतिम विन्यास की आधिकारिक विस्तृत जानकारी रूस की ओर से अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
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