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ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर इजरायल की चिंता बढ़ी, मोसाद का दावा- गहरी सुरंगों में छिपाए गए यूरेनियम सेंट्रीफ्यूज

Published on: July 22, 2026
Iran's nuclear program

द  देवरिया न्यूज़,तेल अवीव : इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर गंभीर दावे सामने आए हैं। इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद का कथित तौर पर मानना है कि ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम से जुड़े सेंट्रीफ्यूज को बेहद सुरक्षित और गहरी भूमिगत सुरंगों में पहुंचा दिया है। आशंका जताई जा रही है कि ईरान इन सुविधाओं के जरिए अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा सक्रिय कर सकता है।

अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बीच यह दावा सामने आया है। दोनों देशों का आरोप रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की आड़ में परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता हासिल कर रहा है। हालांकि, ईरान लगातार इन आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

पिकएक्स माउंटेन में सेंट्रीफ्यूज छिपाने का दावा

‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने इजरायली और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि पिछले साल जून में इजरायल और ईरान के बीच करीब 12 दिन तक चले संघर्ष के बाद ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्धन से जुड़े सेंट्रीफ्यूज को पिकएक्स माउंटेन के नीचे मौजूद गहरी भूमिगत सुरंगों में स्थानांतरित कर दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था। दावा है कि इजरायल ने पिकएक्स माउंटेन से जुड़ी खुफिया जानकारी अमेरिका के साथ भी साझा की है। हालांकि, इन खुफिया दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

क्या है पिकएक्स माउंटेन?

पिकएक्स माउंटेन, जिसे माउंट कोलांग के नाम से भी जाना जाता है, ईरान का एक अत्यधिक सुरक्षित भूमिगत परिसर बताया जाता है। यह ईरान के प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्र नतांज के आसपास के क्षेत्र में स्थित है। रिपोर्टों के अनुसार, इस परिसर में गहरी भूमिगत सुरंगों की दो प्रमुख प्रणालियां हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सुरंगें इतनी गहराई में हैं कि उन्हें नष्ट करना बेहद मुश्किल हो सकता है और यहां तक कि अमेरिका के सबसे शक्तिशाली बंकर-बस्टर हथियार भी इन तक आसानी से नहीं पहुंच सकते।

बताया जाता है कि ईरान ने इस परिसर को यूरेनियम संवर्धन से जुड़े सेंट्रीफ्यूज की असेंबली और अन्य संवेदनशील गतिविधियों के लिए एक सुरक्षित भूमिगत विकल्प के रूप में विकसित किया था।

साइट पर गतिविधियां बढ़ने का दावा

‘इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी’ की रिपोर्टों के हवाले से दावा किया गया है कि पिकएक्स माउंटेन क्षेत्र में हाल के महीनों में ट्रकों की आवाजाही देखी गई है। साथ ही, भूमिगत सुरंगों को मजबूत करने और वहां बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा तैयार करने की गतिविधियों का भी दावा किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान ने पुराने भूमिगत सुरंग नेटवर्क के आसपास निर्माण गतिविधियां दोबारा शुरू की हैं, जिसे लंबे समय से बंद माना जाता था।

इजरायली अधिकारियों और कुछ विशेषज्ञों को आशंका है कि इन भूमिगत सुविधाओं का इस्तेमाल परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी संवेदनशील गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इनमें परमाणु सामग्री के भंडारण से लेकर यूरेनियम संवर्धन की सीमित क्षमता वाली सुविधा स्थापित करने तक की संभावनाएं शामिल बताई जा रही हैं।

इजरायल की चिंता क्यों बढ़ी?

यूरेनियम संवर्धन में सेंट्रीफ्यूज की अहम भूमिका होती है। यह मशीनें यूरेनियम गैस को तेज गति से घुमाकर उसके विभिन्न आइसोटोप को अलग करने में मदद करती हैं। कम स्तर पर संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकता है, जबकि उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम का उपयोग परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।

यही वजह है कि ईरान के सेंट्रीफ्यूज और भूमिगत परमाणु ठिकानों को लेकर इजरायल और पश्चिमी देशों की चिंता बनी हुई है।

इजरायली अधिकारियों का मानना है कि यदि ईरान ने संवेदनशील परमाणु उपकरणों को गहरी भूमिगत सुरंगों में सुरक्षित कर लिया है, तो उन्हें सैन्य कार्रवाई के जरिए नष्ट करना बेहद मुश्किल हो सकता है। इसी कारण इजरायल की ओर से पिकएक्स माउंटेन और ऐसी अन्य संभावित संवेदनशील साइटों पर नजर रखने और उन्हें निशाना बनाने की मांग उठती रही है।

ईरान का दावा- परमाणु हथियार बनाने का इरादा नहीं

इजरायल और अमेरिका के आरोपों के विपरीत ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। तेहरान का दावा है कि वह परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल अपनी ऊर्जा जरूरतों और वैज्ञानिक विकास के लिए करना चाहता है।

ईरान ने परमाणु हथियार विकसित करने की किसी भी योजना से इनकार किया है। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर होने वाली बातचीत में भी तेहरान ने यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि उसका उद्देश्य परमाणु हथियार हासिल करना नहीं है।

हालांकि, इजरायल और अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगातार संदेह जताते रहे हैं। ऐसे में पिकएक्स माउंटेन में कथित गतिविधियों को लेकर सामने आए नए दावों ने दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। यदि इन खुफिया दावों की पुष्टि होती है, तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी भूमिगत सुविधाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो सकती है।


इसे भी पढ़ें : ईरान की अमेरिका को खुली चेतावनी: 2-3 दिन और युद्ध चला तो शुरू होगा विनाशकारी दौर, अमेरिकी ठिकाने भी नहीं रहेंगे सुरक्षित


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