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नई टैक्स व्यवस्था में 15 लाख तक की सैलरी कैसे बन सकती है टैक्स-फ्री, जानिए पूरा गणित

Published on: January 12, 2026
Up to Rs 15 lakh in the new tax system
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही जल्द इनकम टैक्स विभाग नए आईटीआर फॉर्म जारी करने वाला है। इस बीच नई टैक्स व्यवस्था को लेकर करदाताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि टैक्स कैसे बचाया जाए। नई टैक्स व्यवस्था में अगर आपकी सालाना आय 12 लाख रुपये तक है, तो आपको कोई इनकम टैक्स नहीं देना होता। इसके अलावा 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता है, जो इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 115BAC(1A)(iii) के तहत दिया जाता है। इस तरह 12.75 लाख रुपये तक की आय पूरी तरह टैक्स-फ्री हो जाती है।

लेकिन इससे ज्यादा कमाई करने वालों के लिए भी राहत का रास्ता मौजूद है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आपकी कंपनी एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में योगदान करती है, तो नई टैक्स व्यवस्था में भी आप करीब 14.66 लाख रुपये तक की सैलरी को टैक्स-फ्री बना सकते हैं।

EPF और NPS से कैसे मिलेगी राहत

टैक्स एक्सपर्ट गौरव मखीजानी के मुताबिक, नई टैक्स व्यवस्था में कर्मचारी द्वारा EPF में किए गए योगदान पर सेक्शन 80C के तहत छूट नहीं मिलती। यह सुविधा केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में है। हालांकि, कंपनी (एम्प्लॉयर) द्वारा किया गया योगदान टैक्स-फ्री रहता है।

EPF में एम्प्लॉयर का योगदान बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के 12 प्रतिशत तक टैक्स-फ्री होता है, बशर्ते यह कुल 7.5 लाख रुपये की सीमा के भीतर हो। वहीं NPS में एम्प्लॉयर बेसिक सैलरी और DA का 14 प्रतिशत तक योगदान कर सकता है, जो पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में टैक्स-फ्री रहता है।

14.66 लाख की सैलरी का उदाहरण

मान लीजिए आपकी कुल सैलरी 14.66 लाख रुपये है और बेसिक सैलरी इसका 50 प्रतिशत यानी 7.33 लाख रुपये है।
– EPF में एम्प्लॉयर का 12% योगदान: करीब 87,960 रुपये (टैक्स-फ्री)
– NPS में एम्प्लॉयर का 14% योगदान: करीब 1,02,620 रुपये (टैक्स-फ्री)
– स्टैंडर्ड डिडक्शन: 75,000 रुपये

इस तरह कुल टैक्स-फ्री छूट और कटौती करीब 2,65,580 रुपये की हो जाती है।

नतीजा क्या है

अगर आपकी कंपनी EPF और NPS दोनों में योगदान करती है, तो नई टैक्स व्यवस्था में भी आपकी करीब 14.66 लाख रुपये तक की सैलरी टैक्स-फ्री हो सकती है। वहीं अगर केवल EPF की सुविधा मिलती है, तो भी लगभग 13.56 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स नहीं देना पड़ सकता है। नई टैक्स व्यवस्था में यह तरीका मिडिल क्लास और सैलरीड लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।


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