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जर्मनी दौरे पर राजनाथ सिंह, ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप’ पर समझौता; सैन्य सहयोग को नई दिशा

Published on: April 24, 2026
Rajnath Singh on Germany tour
द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों जर्मनी के दौरे पर हैं। उनकी इस यात्रा को रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। 21 अप्रैल को जब वह म्यूनिख से बर्लिन पहुंचे, तो उनके विशेष विमान को जर्मन वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट किया। यह सम्मान इस दौरे के सामरिक महत्व को दर्शाता है। बर्लिन पहुंचने पर उन्हें औपचारिक सैन्य सम्मान भी दिया गया।
दौरे के दूसरे दिन, 22 अप्रैल को रक्षामंत्री ने जर्मनी के कील शहर में स्थित ThyssenKrupp Marine Systems (TKMS) के सबमरीन निर्माण संयंत्र का दौरा किया। यहां उन्होंने आधुनिक नौसैनिक तकनीकों और निर्माण क्षमताओं का जायजा लिया। यह दौरा भारत की नौसेना के आधुनिकीकरण और संभावित रक्षा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक रही। इस दौरान दोनों देशों के बीच ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप’ पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता भारत और जर्मनी के बीच रक्षा उत्पादन, तकनीकी साझेदारी और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात, उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियों और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद की हर रूप में बिना किसी अपवाद के निंदा होनी चाहिए। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भरोसेमंद और मजबूत साझेदारी की जरूरत पहले से कहीं अधिक है।
इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक ‘इम्प्लीमेंटिंग अरेंजमेंट’ पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण, अनुभव साझा करने और मिशनों में बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि वैश्विक शांति प्रयासों में दोनों देशों की भूमिका और प्रभावी हो सके।
बैठक के बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इसे “सकारात्मक और सार्थक” बताया। उन्होंने कहा कि इस बातचीत से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और गहरा होगा तथा वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर साझा समझ विकसित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत-जर्मनी संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला साबित हो सकता है। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और वैश्विक शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साझा करते हैं। ऐसे में रक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्थिरता में भी अहम योगदान देगा।

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