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देवरिया के मोतीपुर में 23 मई को होगा “अजमते वालिदैन कांफ्रेंस व जलसा-ए-दस्तारबंदी”, उलेमा और नातख्वां होंगे शामिल

Published on: May 21, 2026
Will be held on 23rd May in Motipur, Deoria
द  देवरिया न्यूज़,देवरिया : देवरिया जनपद के मोतीपुर क्षेत्र में 23 मई 2026, शनिवार की शाम अकीदत, इल्म और दीन की रोशनी से सराबोर एक भव्य धार्मिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम “अजमते वालिदैन कांफ्रेंस व जलसा-ए-दस्तारबंदी” का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम मदरसा दारुल उलूम कादरिया एवं मदरसा जैतून निशा निस्वां के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होगा। कार्यक्रम को लेकर पूरे इलाके में उत्साह का माहौल है और तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।

आयोजकों के अनुसार यह जलसा समाज में शिक्षा, इंसानियत, भाईचारा और वालिदैन यानी माता-पिता की इज्जत और अहमियत को उजागर करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से नामचीन उलेमा-ए-किराम, इस्लामिक स्कॉलर, नातख्वां और शायर शिरकत करेंगे। जलसे में तकरीर, नातिया कलाम, दीन-ए-इस्लाम की तालीम और दस्तारबंदी जैसी अहम रस्में अदा की जाएंगी।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान मौलाना हस्सान बिन नूर वास्ती मौजूद रहेंगे, जो अपने खास अंदाज और इल्मी बयान के लिए जाने जाते हैं। उनके अलावा कई अन्य उलेमा भी मंच से दीन और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखेंगे। जलसे में नात और मनकबत पेश करने के लिए मशहूर नातख्वां और शायरों को भी आमंत्रित किया गया है, जिनकी आवाज से महफिल को रूहानी रंग मिलेगा।

इस कार्यक्रम की एक खास बात यह भी है कि सोशल मीडिया पर इन दिनों चर्चित चेहरा बने “झारखंडी बाबा” भी जलसे में शामिल होंगे। उनके शामिल होने की खबर के बाद युवाओं और अकीदतमंदों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि जलसे में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान मदरसों में तालीम हासिल करने वाले छात्रों की दस्तारबंदी की रस्म भी अदा की जाएगी। इस रस्म को इस्लामी शिक्षा पूरी करने वाले छात्रों के सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य की दुआ के रूप में देखा जाता है। दस्तारबंदी के जरिए समाज को शिक्षा और इल्म की अहमियत का संदेश भी दिया जाएगा।

आयोजन समिति के सदस्य हाजी अब्दुल शकूर, इस्तियाक अहमद, नौशाद अहमद और वासिम अहमद ने बताया कि कार्यक्रम में आने वाले मेहमानों और अकीदतमंदों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। बैठने की समुचित व्यवस्था के साथ-साथ पेयजल, रोशनी और सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। महिलाओं के लिए अलग से पर्दे की व्यवस्था की गई है ताकि वे भी आराम और सुकून के साथ कार्यक्रम में शामिल हो सकें।

आयोजकों ने बताया कि यह जलसा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास है। मौजूदा दौर में जब सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में “अजमते वालिदैन” जैसे कार्यक्रम लोगों को अपने माता-पिता की इज्जत, तालीम की अहमियत और इंसानियत के रास्ते पर चलने की सीख देते हैं।

मदरसा प्रबंधन और आयोजन समिति ने क्षेत्र के तमाम लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में पहुंचकर इसे सफल बनाएं और दीन व इल्म की इस महफिल का हिस्सा बनें। कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर स्थानीय लोग भी उत्साहित नजर आ रहे हैं और क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना हुआ है।


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