रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की मिसाइलों ने जिस सटीकता से खाड़ी देशों में लक्ष्य भेदा, उससे कई रक्षा विशेषज्ञ अमेरिका के THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) सिस्टम को “लीक होती छतरी” तक करार दे रहे हैं। खाड़ी देशों में यह बहस तेज हो गई है कि क्या उन्होंने इन रक्षा प्रणालियों पर अरबों डॉलर खर्च कर सही फैसला किया।
अमेरिका का THAAD सिस्टम और पैट्रियट PAC-3 बैटरियां उसकी सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा माने जाते हैं। लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित THAAD को ऊंचाई पर बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि पैट्रियट सिस्टम कम दूरी के खतरों और ड्रोन से निपटने में सक्षम है। इन प्रणालियों को अमेरिका ने खाड़ी देशों को “गोल्ड स्टैंडर्ड” के रूप में पेश किया था।
हालांकि 28 फरवरी से 8 अप्रैल तक चले संघर्ष के दौरान सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर जैसे देशों में ईरानी हमलों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए। कई जगहों पर मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचीं और अमेरिकी ठिकानों को भी नुकसान होने की खबरें सामने आईं।
सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर दावा किया गया है कि जॉर्डन, सऊदी अरब और यूएई में THAAD सिस्टम के AN/TPY-2 रडार, जिन्हें इसकी “आंख” माना जाता है, निशाने पर आए। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस, जॉर्डन के मुवफ़्फक साल्टी एयर बेस और यूएई के अल रुवैस क्षेत्र में तैनात सिस्टम को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पैट्रियट सिस्टम को बड़ी संख्या में आने वाले ड्रोन और मिसाइलों से निपटने में कठिनाई हुई। ईरान द्वारा एक साथ बड़ी संख्या में सस्ते ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के इस्तेमाल ने इन रक्षा प्रणालियों की सीमाएं उजागर कर दीं।
पिछले साल मई में सऊदी अरब और अमेरिका के बीच 142 अरब डॉलर के बड़े रक्षा समझौते पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। इस पैकेज में THAAD, पैट्रियट अपग्रेड, आधुनिक मिसाइलें और ड्रोन शामिल थे।
ईरान के हमलों के बाद खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य उपकरणों पर निर्भरता को लेकर नई बहस छिड़ गई है। जिन सिस्टम्स को अब तक अभेद्य सुरक्षा कवच माना जाता था, वे बड़े पैमाने पर हमलों के सामने कमजोर नजर आ रहे हैं।