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राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा फहराया, PM मोदी बोले—‘आज सदियों के घाव भर रहे हैं’

Published on: November 26, 2025
Religious flag on the peak of Ram temple

द देवरिया न्यूज़/अयोध्या: भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य शिखर पर धर्मध्वजा फहराए जाने का ऐतिहासिक क्षण सोमवार को पूरे देश के लिए गर्व और भावनाओं से भरा हुआ रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभ मुहूर्त में मंदिर के शीर्ष पर केसरिया धर्मध्वज फहराया और इसे भारत की सांस्कृतिक चेतना के उत्कर्ष का पल बताया। जैसे ही ध्वज शिखर तक पहुंचा, परिसर ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंज उठा। साधु-संतों से लेकर आम भक्तों तक, हर व्यक्ति इस अद्भुत क्षण का साक्षी बना।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि आज सदियों पुराने घाव भर रहे हैं और वेदना का अंत हो रहा है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के शिखर पर फहरा यह ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह ध्वज उन करोड़ों सपनों का साकार रूप है, जिन्हें देश और दुनिया के रामभक्तों ने वर्षों से अपने हृदय में संजोकर रखा था।


‘आज पूरी दुनिया राममय है’ — प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री ने भावनाओं से ओत-प्रोत भाषण देते हुए कहा कि 25 नवंबर का दिन इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा, क्योंकि यह वह दिन है जब भारत और पूरी दुनिया राममय हो गई है। उन्होंने कहा कि अयोध्या वह भूमि है जहां आदर्श और आचरण एक रूप लेते हैं। राम मंदिर पर फहराया गया यह धर्मध्वज आने वाली पीढ़ियों तक प्रभु श्रीराम के आदर्शों को पहुंचाने का कार्य करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूरे विश्व को यह संदेश है कि भारत अपनी सांस्कृतिक धरोहर और मूल्यों के प्रति कितना सजग है। उन्होंने कहा कि यह ध्वजा युगों—युगों तक रामकथा का प्रकाश पूरे संसार में फैलाता रहेगा।


‘युवराज से पुरुषोत्तम बनने की यात्रा का संदेश’

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान भगवान राम के जीवन के कई प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राम केवल अयोध्या के राजा नहीं, बल्कि आदर्श और मर्यादा के प्रतीक हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब भगवान राम वनवास पर गए थे, तब वे अयोध्या के युवराज थे, लेकिन जब लौटे तो ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ बनकर आए। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परिवर्तन केवल भगवान राम की यात्रा का हिस्सा नहीं था, बल्कि समाज और संस्कृति के उत्थान का प्रतिबिंब था।

उन्होंने कहा कि भारत के नागरिकों को भी राम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अवसर सिर्फ उत्सव का नहीं, बल्कि संकल्प का भी है—संकल्प अपने भीतर ‘राम’ को जगाने का।


‘मैकाले की मानसिकता से मुक्त होना जरूरी’

अपने भाषण में प्रधान मंत्री मोदी ने भारत पर थोपे गए औपनिवेशिक प्रभाव और मानसिकता पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेज अधिकारी लार्ड मैकाले ने भारतीयों के मन में विदेशी संस्कृति को श्रेष्ठ बताकर एक गुलाम मानसिकता पैदा की थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत को अब उस मानसिक गुलामी से पूरी तरह बाहर निकलने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में भले ही प्रगति कर ली हो, लेकिन सांस्कृतिक आत्मविश्वास को पूरी तरह जगाना अभी बाकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले 10 वर्षों में भारत इस मानसिकता से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा और सांस्कृतिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनेगा।


भव्य आयोजन में उमड़ा जनसैलाब

धर्मध्वज फहराने के कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में हजारों साधु-संत, विविध समुदायों के प्रमुख प्रतिनिधि, देशभर से आए विशिष्ट अतिथि और लाखों श्रद्धालु मौजूद रहे। पूरा अयोध्या शहर दीपों, पुष्पों और रंगोलियों से जगमगा रहा था। नगाड़ों की गूंज, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तों के जयकारों से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

प्रधानमंत्री ने मंदिर निर्माण से जुड़े सभी लोगों — वास्तुकारों, इंजीनियरों, कारीगरों और दानदाताओं — को धन्यवाद दिया और कहा कि उनके प्रयासों से सदियों का सपना साकार हुआ है।


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