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अल-अक्सा मस्जिद को लेकर बढ़ा विवाद, जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला के सामने खड़ी हुई बड़ी चुनौती

Published on: June 1, 2026
Increase regarding Al-Aqsa Mosque

द  देवरिया न्यूज़,अम्मान : यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद परिसर को लेकर पश्चिम एशिया में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में शामिल अल-अक्सा पर इजरायल की बढ़ती दखलंदाजी और नियंत्रण को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा जॉर्डन के राजा किंग अब्दुल्ला द्वितीय के लिए राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

ब्रिटिश पत्रकार और लेखक पीटर ओबॉर्न ने मिडिल ईस्ट आई में प्रकाशित अपने लेख में कहा है कि वर्ष 2000 में तत्कालीन इजरायली विपक्षी नेता एरियल शेरॉन के अल-अक्सा परिसर दौरे के बाद से इस क्षेत्र में इजरायल की मौजूदगी लगातार बढ़ी है। उनके अनुसार, उसी दौर से परिसर पर नियंत्रण को लेकर तनाव गहराने लगा।

अल-अक्सा के पारंपरिक संरक्षक हैं जॉर्डन के राजा

अंतरराष्ट्रीय समझौतों और ऐतिहासिक व्यवस्थाओं के तहत अल-अक्सा मस्जिद परिसर के धार्मिक संरक्षक (Custodian) के रूप में जॉर्डन के शाही परिवार की भूमिका मानी जाती है। किंग अब्दुल्ला द्वितीय इस जिम्मेदारी को निभाते हैं और परिसर के धार्मिक मामलों की देखरेख जॉर्डन समर्थित इस्लामिक वक्फ के माध्यम से होती है।

हालांकि रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बीते वर्षों में परिसर के प्रशासनिक और सुरक्षा मामलों में इजरायल का प्रभाव बढ़ा है। परिसर में इजरायली सुरक्षा बलों की मौजूदगी और विभिन्न गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर कई बार विवाद सामने आ चुके हैं।

नई रिपोर्टों से बढ़ी चर्चा

मिडिल ईस्ट आई की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल से जुड़े कुछ राजनीतिक हलकों में अल-अक्सा के प्रबंधन ढांचे में बदलाव को लेकर विचार-विमर्श हुआ है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सीमित रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, यदि भविष्य में ऐसी कोई योजना आगे बढ़ती है तो जॉर्डन की पारंपरिक संरक्षक भूमिका प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि इस विषय को क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जॉर्डन के सामने कठिन संतुलन

विश्लेषकों का मानना है कि जॉर्डन को एक ओर अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक जिम्मेदारियों को निभाना है, वहीं दूसरी ओर उसे अमेरिका और इजरायल के साथ अपने रणनीतिक संबंधों का भी ध्यान रखना पड़ता है।

जॉर्डन सुरक्षा, जल संसाधनों और आर्थिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में इजरायल के साथ समझौतों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में अल-अक्सा को लेकर किसी भी बड़े टकराव का असर क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है।

ऐतिहासिक भूमिका का हवाला

जॉर्डन के शाही परिवार ने कई बार अल-अक्सा और यरुशलम के पवित्र स्थलों की रक्षा को अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी बताया है। हाशमी राजवंश से जुड़े दस्तावेजों और आधिकारिक बयानों में भी इस भूमिका पर विशेष जोर दिया जाता रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अल-अक्सा केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि अरब और मुस्लिम दुनिया की भावनाओं से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है। इसलिए इस परिसर से जुड़ा कोई भी बड़ा बदलाव पूरे क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।

पश्चिम एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है असर

गाजा युद्ध, वेस्ट बैंक में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच अल-अक्सा मस्जिद का मुद्दा और अधिक संवेदनशील बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में जॉर्डन, इजरायल और अमेरिका के बीच इस विषय पर होने वाले फैसले पश्चिम एशिया की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अल-अक्सा के प्रशासनिक ढांचे में कोई बड़ा बदलाव होगा या नहीं, लेकिन इस मुद्दे ने जॉर्डन के राजा किंग अब्दुल्ला द्वितीय के सामने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और धार्मिक चुनौती जरूर खड़ी कर दी है।


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