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इस्लामिक देशों में ‘नाटो जैसी’ सैन्य गठबंधन की हलचल, रियाद में हुई अहम बैठक

Published on: March 23, 2026
'Like NATO' in Islamic countries
द  देवरिया न्यूज़,रियाद : अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस्लामिक देशों में नाटो की तर्ज पर एक नए सैन्य गठबंधन की संभावना को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में गुरुवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की एक अहम बैठक हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की गई।
मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक इस्लामिक देशों के एक शिखर सम्मेलन के दौरान अलग से आयोजित की गई थी। इसमें इस बात पर विचार किया गया कि क्षेत्र के प्रभावशाली देश किस तरह अपनी ताकतों को एकजुट कर मौजूदा संकटों का समाधान निकाल सकते हैं।
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि क्षेत्रीय देशों को अपनी समस्याओं का समाधान खुद निकालना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर ये देश एकजुट नहीं होते हैं, तो बाहरी ताकतें अपने हितों के अनुसार समाधान थोप सकती हैं। फिदान ने क्षेत्रीय “ओनरशिप” यानी आत्मनिर्भर सुरक्षा ढांचे पर बल दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की पिछले एक साल से पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ एक सुरक्षा समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और अब वह इसमें मिस्र को भी शामिल करना चाहता है। हालांकि, यह गठबंधन NATO जैसा औपचारिक और बाध्यकारी नहीं होगा, बल्कि एक सहयोगी सुरक्षा मंच के रूप में काम कर सकता है, जिससे रक्षा उद्योग और रणनीतिक मामलों में तालमेल बढ़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गठबंधन आकार लेता है, तो यह इस्लामिक दुनिया में एक मजबूत सामरिक धुरी बन सकता है। पाकिस्तान जहां परमाणु क्षमता रखने वाला इकलौता इस्लामिक देश है, वहीं तुर्की ने हाल के वर्षों में अपने रक्षा उद्योग, खासकर ड्रोन तकनीक में बड़ी प्रगति की है। सऊदी अरब भी आधुनिक तकनीक और रक्षा निवेश के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है, जबकि मिस्र क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता हुआ था। ऐसे में यदि तुर्की और मिस्र भी इस पहल में शामिल होते हैं, तो यह गठबंधन मध्य-पूर्व और इस्लामिक दुनिया की रणनीतिक तस्वीर को बदल सकता है। माना जा रहा है कि ईरान-इजरायल संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह पहल क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को नया रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है।

इसे भी पढ़ें : सीतापुर में तेज रफ्तार डंपर का कहर, बाइक सवार दो युवकों की मौत


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