द देवरिया न्यूज़,देवरिया/बघौचघाट : देवरिया में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘साइ वज्र’ के तहत एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस ने म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से पुलिस ने दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 17 सिम कार्ड, दो आधार कार्ड, पांच बैंक पासबुक और एक नोटबुक बरामद की है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान अमित कन्नौजिया (27 वर्ष) पुत्र के रूप में हुई है, जो बघौचघाट थाना क्षेत्र के छितौनी पथरदेवा का निवासी बताया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद वह खातों से जुड़े एटीएम कार्ड, पासबुक, सिम कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लेता था।
सरकारी योजनाओं का झांसा देकर खुलवाता था खाते
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी ग्रामीण और जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। खाता खुलने के बाद संबंधित खातों के एटीएम कार्ड, पासबुक और सिम कार्ड आरोपी अपने पास रख लेता था।
इन बैंक खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी के जरिए हासिल की गई रकम को प्राप्त करने और उसे आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। पुलिस का दावा है कि आरोपी कुछ बैंक खाते और सिम कार्ड बिहार में सक्रिय साइबर अपराधियों को भी उपलब्ध कराता था।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे बैंक खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को रखने या दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता है। कई मामलों में अपराधी आम लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल साइबर अपराध में करते हैं।
पुलिस के अनुसार, इस तरह के खातों के जरिए ठगी की रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए रकम के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
नोटबुक से मिले 50 बैंक खातों और 46 मोबाइल नंबरों के विवरण
पुलिस ने आरोपी के पास से बरामद नोटबुक की जांच की तो उसमें करीब 50 बैंक खातों और 46 मोबाइल नंबरों का विवरण दर्ज मिला। इसके बाद पुलिस की जांच का दायरा और बढ़ गया है।
साइबर क्राइम थाना पुलिस अब बरामद दस्तावेजों, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों में कितनी साइबर ठगी की रकम का लेनदेन हुआ और इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हैं।
बिहार के साइबर अपराधियों से कनेक्शन की जांच
पुलिस को आशंका है कि आरोपी का नेटवर्क बिहार में सक्रिय साइबर अपराधियों से भी जुड़ा हो सकता है। पुलिस अब इस कनेक्शन की गहनता से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बैंक खाते और सिम कार्ड किन लोगों को उपलब्ध कराए गए थे।
आरोपी के खिलाफ साइबर थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मानना है कि इस साइबर ठगी नेटवर्क में आरोपी के अलावा कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। संभावित आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगातार प्रयास कर रही है।
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