द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। भारत ने ब्रिक्स (BRICS) देशों को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने और सामूहिक रणनीति अपनाने का संदेश दिया है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक और उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई चर्चा में आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, नई तकनीकों से जुड़े जोखिम और ग्लोबल साउथ के मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स की भूमिका पर दिया जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों से मुलाकात के दौरान कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने में ब्रिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने, ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और सुरक्षित व समावेशी विश्व व्यवस्था के निर्माण के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
प्रधानमंत्री के अनुसार, बदलते वैश्विक परिदृश्य में देशों के बीच समन्वय और साझा रणनीति पहले से अधिक आवश्यक हो गई है।
ग्लोबल साउथ और आतंकवाद पर विशेष फोकस
बैठक में भारत ने दो प्रमुख मुद्दों पर विशेष जोर दिया—
- आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई
- ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा
भारत का मानना है कि विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंचों पर अधिक प्रभावी ढंग से उठाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ के मुद्दों को प्राथमिकता दे रहा है।
अजीत डोभाल ने उभरते सुरक्षा खतरों से किया आगाह
ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने की।
उन्होंने कहा कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियां अब पारंपरिक सीमाओं में नहीं बंधी हैं। साइबर हमले, आतंकवादी संगठनों द्वारा नई तकनीकों का उपयोग और डिजिटल खतरों ने सुरक्षा की परिभाषा बदल दी है।
डोभाल ने कहा कि:
“गैर-पारंपरिक खतरे देशों की सीमाएं पार कर चुके हैं और पारंपरिक जवाबी रणनीतियों को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में सदस्य देशों को मिलकर समाधान तलाशना होगा।”
किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
22 से 23 जून 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ, जिनमें शामिल हैं—
प्रमुख एजेंडा:
- आतंकवाद और चरमपंथ
- साइबर सुरक्षा
- ऊर्जा सुरक्षा
- खाद्य सुरक्षा
- सप्लाई चेन में बाधाएं
- पर्यावरणीय अस्थिरता
- उभरती तकनीकों से जुड़े खतरे
- आतंकवादी नेटवर्क द्वारा तकनीक का उपयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि इन मुद्दों पर ब्रिक्स देशों का सहयोग भविष्य की वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
भारत की अध्यक्षता को मिला समर्थन
बैठक में शामिल सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने 2026 के लिए भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन किया और संगठन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारत की पहल की सराहना की।
भारत का लक्ष्य ब्रिक्स को केवल आर्थिक मंच तक सीमित न रखकर सुरक्षा, तकनीक और विकास सहयोग के व्यापक मंच के रूप में स्थापित करना है।
BRICS के सदस्य और पार्टनर देश
सदस्य देश
- भारत
- ब्राजील
- रूस
- चीन
- दक्षिण अफ्रीका
- मिस्र
- इथियोपिया
- ईरान
- इंडोनेशिया
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात
पार्टनर देश
- बेलारूस
- बोलीविया
- क्यूबा
- कजाकिस्तान
- मलेशिया
- नाइजीरिया
- थाईलैंड
- युगांडा
- उज्बेकिस्तान
- वियतनाम
निष्कर्ष
भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियां केवल किसी एक देश की समस्या नहीं हैं। आतंकवाद, साइबर हमले, ऊर्जा संकट और तकनीकी जोखिमों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों को साझा रणनीति और मजबूत सहयोग की आवश्यकता है। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स अब ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने और बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है।
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