बुशेहर परमाणु संयंत्र दक्षिणी ईरान में फारस की खाड़ी के तट पर स्थित देश का पहला व्यावसायिक परमाणु ऊर्जा केंद्र है। युद्ध के दौरान इस साइट को चौथी बार निशाना बनाए जाने से इसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार ऐसे हमले परमाणु सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने कहा कि परमाणु संयंत्रों या उनके आसपास किसी भी तरह का सैन्य हमला नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि सहायक इमारतों में भी सुरक्षा से जुड़े अहम उपकरण होते हैं, जिनके क्षतिग्रस्त होने से परमाणु दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।
IAEA के बयान के अनुसार, घटना में एक सुरक्षाकर्मी की मौत हुई है और साइट पर मौजूद एक इमारत को नुकसान पहुंचा है। हालांकि एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक रेडिएशन स्तर में किसी प्रकार की बढ़ोतरी की सूचना नहीं मिली है। फिर भी हाल के हफ्तों में इस तरह की चौथी घटना ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है।
इस बीच, 28 फरवरी से जारी ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच संघर्ष और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका की ओर से ईरान के बुनियादी ढांचे, जैसे पुलों और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है। वहीं, ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने हाल ही में अमेरिका के दो लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इससे युद्ध की रणनीति या कूटनीतिक प्रयासों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहे, तो वह न सिर्फ अमेरिका और इजरायल, बल्कि उन खाड़ी देशों को भी निशाना बना सकता है, जो अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपने यहां जगह दे रहे हैं।
कुल मिलाकर, बुशेहर परमाणु संयंत्र के पास हुआ यह हमला केवल एक सैन्य घटना नहीं, बल्कि वैश्विक परमाणु सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
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