द देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने विवाद और देरी के बीच आखिरकार एक चीनी कंपनी को गधों के मांस के निर्यात की मंजूरी दे दी है। यह फैसला तब लिया गया जब कंपनी ने मंजूरी में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए पाकिस्तान में अपना कारोबार बंद करने की चेतावनी दी थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला शुक्रवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद तेजी से सुलझा। पीएम ऑफिस से निर्देश मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसके बाद पशु क्वारंटाइन विभाग ने भी निर्यात की अनुमति जारी कर दी। यह मंजूरी कई महीनों से लंबित थी, लेकिन अचानक प्रक्रिया को तेज करते हुए शनिवार तक इसे अंतिम रूप दे दिया गया।
बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने पहले चीनी कंपनी पर अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पशुओं की ब्रीडिंग और तैयारी की शर्तें पूरी न करने का आरोप लगाया था। इसके चलते मंजूरी में देरी हो रही थी। हालांकि, इस महीने के अंत में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की प्रस्तावित चीन यात्रा को देखते हुए इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया गया, ताकि यह मामला कूटनीतिक स्तर पर विवाद का कारण न बने।
चीन की मेसर्स हैंगेंग ट्रेड कंपनी, जो ग्वादर नॉर्थ फ्री जोन में संचालित हो रही है, कृषि और पशु उत्पादों के चीन निर्यात पर केंद्रित है। कंपनी के पास गधों के मांस और खाल के निर्यात के लिए एक बूचड़खाना भी है। कंपनी का दावा है कि उसने अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा किया है, इसके बावजूद उसे समय पर मंजूरी नहीं मिल रही थी, जिससे उसका निर्यात कार्य प्रभावित हो रहा था।
1 मई को कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा था कि गैर-बाजार कारकों और प्रशासनिक बाधाओं के कारण वह अपने सामान्य संचालन को जारी रखने में असमर्थ हो रही है। साथ ही चेतावनी दी थी कि यदि हालात नहीं सुधरे तो उसे अपनी फैक्ट्री बंद करनी पड़ सकती है। इस बयान के बाद पाकिस्तान के व्यापारिक और निवेश जगत में हलचल तेज हो गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी उस समय और नाराज हो गई जब 27 अप्रैल को आर्थिक समन्वय समिति (ECC) द्वारा लिए गए निर्णय को 29 अप्रैल को संघीय कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद कंपनी ने सख्त रुख अपनाते हुए अन्य चीनी निवेशकों को भी पाकिस्तान में निवेश से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी।
गौरतलब है कि चीन में गधों के मांस और खाल की काफी मांग है। विशेष रूप से गधे की खाल से बनने वाली पारंपरिक दवा “एजियाओ” के कारण इसकी मांग बढ़ी है। इस दवा को ताकत बढ़ाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता सुधारने और कुछ बीमारियों में उपयोगी माना जाता है।
इसी बढ़ती मांग को देखते हुए चीन ने पाकिस्तान में गधों के फार्म स्थापित करने में भी रुचि दिखाई है। दोनों देशों के बीच इस विषय पर पहले भी उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। पाकिस्तान सरकार को उम्मीद है कि इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से व्यापार को गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
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