द देवरिया न्यूज़,कोलंबो : श्रीलंका के उत्तरी क्षेत्र जाफना के पास स्थित चेम्मानी में सामूहिक कब्रों की खुदाई एक बार फिर शुरू की जाएगी। जाफना मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। यह खुदाई पिछले साल फंड की कमी के कारण रोक दी गई थी, जिसे अब दोबारा शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
जानकारी के मुताबिक, पिछले वर्ष करीब 45 दिनों तक चली खुदाई के दौरान 240 कंकाल बरामद किए गए थे। इसके अलावा हड्डियों के ढेर, बच्चों से जुड़ी वस्तुएं जैसे दूध की बोतलें, खिलौने और स्कूल बैग भी मिले थे। इन अवशेषों को श्रीलंका के 1980 और 1990 के दशक के गृहयुद्ध के दौरान मारे गए लोगों से जुड़ा माना जा रहा है, हालांकि इनकी अंतिम पुष्टि अभी बाकी है।
मंगलवार को अदालत को बताया गया कि खुदाई के लिए करीब 21 लाख श्रीलंकाई रुपये (एलकेआर) का फंड उपलब्ध करा दिया गया है, जिसके बाद प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी। अदालत ने अंतरराष्ट्रीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, इटली और रोमानिया के राजनयिक प्रतिनिधियों को भी खुदाई स्थल का निरीक्षण करने की अनुमति दी है।
चेम्मानी क्षेत्र पहली बार 1990 के दशक में चर्चा में आया था, जब श्रीलंका की सेना और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के बीच संघर्ष चरम पर था। वर्ष 1998 में यहां से पहली बार 15 कंकाल बरामद किए गए थे, जिसके बाद इस इलाके को संभावित सामूहिक कब्रों का स्थल माना जाने लगा।
हालिया घटनाक्रम के अनुसार, 13 फरवरी 2025 को विकास कार्यों के दौरान फिर से कंकालों के अवशेष मिले थे। इसके बाद अदालत ने न्यायिक जांच के आदेश दिए और 15 मई 2025 से खुदाई शुरू हुई थी, लेकिन बाद में इसे रोक दिया गया था।
श्रीलंका के मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। आयोग के अनुसार, इस बात की प्रबल संभावना है कि यहां दफनाए गए शव गैर-कानूनी हत्याओं, यानी न्यायेतर हत्याओं के शिकार लोगों के हो सकते हैं। हालांकि, मृतकों की पहचान, उनकी मौत के कारण और समय को लेकर अब भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये अवशेष उन लोगों के हो सकते हैं जो गृहयुद्ध के दौरान लापता हो गए थे। यह संघर्ष 1983 में शुरू हुआ था और 2009 में समाप्त हुआ, जिसमें हजारों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए।
चेम्मानी को लेकर संदेह उस समय और गहरा गया था, जब एक मामले में दोषी ठहराए गए सेना के एक जवान ने कथित तौर पर यह स्वीकार किया था कि उसने आदेश के तहत शवों को ठिकाने लगाने में भूमिका निभाई थी। हालांकि इस मामले में शामिल सभी दोषियों ने बाद में इन आरोपों से इनकार किया।
अब खुदाई दोबारा शुरू होने के साथ उम्मीद जताई जा रही है कि इस रहस्यमयी सामूहिक कब्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। यह प्रक्रिया न केवल पीड़ितों के परिवारों के लिए सच्चाई जानने का जरिया बनेगी, बल्कि श्रीलंका में मानवाधिकार और न्याय की दिशा में भी एक अहम कदम साबित हो सकती है।
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