द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद विपक्ष केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर है। इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के एक बयान को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पुरी ने दावा किया कि भारत ने कभी रूस से एलएनजी (LNG) आयात नहीं किया, जिस पर शिवसेना (यूबीटी) नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने दस्तावेजों के साथ पलटवार किया है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद के जवाब का दिया हवाला
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वर्ष 2022 में संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में खुद मंत्रालय ने स्वीकार किया था कि भारत ने रूस से LNG आयात किया था, भले ही उसकी मात्रा कम रही हो। उन्होंने आरोप लगाया कि अब अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते के कारण भारत अपने ऊर्जा संबंधी फैसलों में समझौता कर रहा है।
उन्होंने कहा, “भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। भारत ने रूस से LNG आयात किया था और अब उसे त्यागने की बात की जा रही है।”
‘भारतीयों को भुगतने पड़ेंगे परिणाम’
प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका के दबाव में रूस से तेल और गैस खरीदने के अधिकार सीमित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर आम भारतीयों को झेलना पड़ेगा।
उन्होंने लिखा, “एक व्यापार समझौते की आड़ में भारत की ऊर्जा जरूरतों पर स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हुई है। इतिहास इसे जरूर याद रखेगा।”
हरदीप पुरी ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ‘CII Annual Business Summit 2026’ में कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट का असर भारतीय तेल कंपनियों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी तेल कंपनियों को फिलहाल हर दिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
पुरी के मुताबिक यदि यही स्थिति बनी रही तो एक तिमाही में यह नुकसान 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के कारण दबाव और बढ़ गया है।
तेल कंपनियों के नुकसान का अनुमान बढ़ा
इंडस्ट्री अनुमान के मुताबिक इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों को वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में संयुक्त रूप से करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।
पहले अनुमान लगाया गया था कि यदि कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है तो कंपनियों को हर महीने करीब 27 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा, लेकिन मौजूदा हालात में यह आंकड़ा और अधिक माना जा रहा है।
सरकार का दावा- पर्याप्त ऊर्जा भंडार मौजूद
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच हरदीप पुरी ने कहा कि भारत के पास फिलहाल करीब 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और LNG का पर्याप्त भंडार है। वहीं LPG का स्टॉक लगभग 45 दिनों तक की जरूरत पूरी कर सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार ने एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया है। पहले जहां प्रतिदिन 35-36 हजार टन उत्पादन होता था, अब इसे बढ़ाकर करीब 54 हजार टन प्रतिदिन कर दिया गया है।
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