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बांग्लादेश के नेता मुहम्मद यूनुस के विवादित नक्शे पर बवाल; भारत ने पूर्वोत्तर सीमा पर बढ़ाई सैन्य ताकत

Published on: November 18, 2025
Bangladesh leader Muhammad Yunus

द देवरिया न्यूज़/ नई दिल्ली: बांग्लादेश के अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस द्वारा एक पाकिस्तानी जनरल को उपहार स्वरूप एक ऐसी किताब भेंट करना, जिसमें पूर्वोत्तर भारत का विकृत नक्शा छपा है, नया भू-राजनीतिक विवाद खड़ा कर चुका है। इस कथित नक्शे में भारत के असम सहित पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाया गया है। यूनुस द्वारा साझा की गई तस्वीर में वह पाकिस्तान के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष जनरल साहिर शमशाद मिर्ज़ा को “Art of Triumph: Bangladesh’s New Dawn” नामक पुस्तक देते हुए नजर आते हैं। इस घटना ने दोनों देशों के बीच खटास को और बढ़ा दिया है।

सल्तनत-ए-बांग्ला का ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ कॉन्सेप्ट

द इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, विवादित नक्शा ढाका स्थित एक इस्लामी संगठन सल्तनत-ए-बांग्ला द्वारा प्रचारित ग्रेटर बांग्लादेश विचार का हिस्सा है। इस अवधारणा में बांग्लादेश की सीमाएं बढ़ाकर भारत के पूर्वोत्तर के सातों राज्य, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा के कुछ हिस्से और म्यांमार के अराकान क्षेत्र को शामिल दिखाया गया है।
विशेषज्ञों ने इसे भारत की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ ‘‘माइंड गेम’’ करार दिया है।

‘चिकन नेक’ पर यूनुस का पुराना बयान भी चर्चा में

यह पहला अवसर नहीं है जब यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर पर टिप्पणी की हो। अप्रैल में चीन यात्रा के दौरान उन्होंने कहा था कि भारत के सातों उत्तर-पूर्वी राज्य “स्थल-रुद्ध” हैं और उनके पास समुद्र तक पहुंच का कोई रास्ता नहीं है। उनका यह इशारा भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर—जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है—की भू-रणनीतिक कमजोरी पर परोक्ष चेतावनी माना गया था।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसके जवाब में पूर्वोत्तर को ‘बिम्सटेक कनेक्टिविटी हब’ बताते हुए कहा था कि भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पूर्वोत्तर पर आधारित है और इसे कमजोर करने की कोशिश सफल नहीं होगी।


भारत और बांग्लादेश के बीच रणनीतिक गलियारे चर्चा में

चटगांव कॉरिडोर: बांग्लादेश की जीवनरेखा

सूत्रों के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व बांग्लादेश की 30 किलोमीटर की संकरी पट्टी—चटगांव गलियारा— देश को उसके सबसे बड़े बंदरगाह चटगांव पोर्ट से जोड़ती है।
इसी गलियारे से बांग्लादेश के 90% विदेशी व्यापार का संचालन होता है।
भारत के त्रिपुरा के लिए भी यह समुद्र तक पहुंचने का सबसे नजदीकी रास्ता है।

रंगपुर कॉरिडोर: 90 किमी की रणनीतिक पट्टी

मेघालय के दक्षिण-पश्चिम गारो हिल्स और पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर के बीच स्थित 90 किमी लंबा रंगपुर कॉरिडोर भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा था कि ‘‘चटगांव के पास से गुजरने वाला गलियारा इतनी संकरी है कि एक पत्थर फेंककर भी रोका जा सकता है।’’

चीन की दिलचस्पी ने बढ़ाई चिंता

नई रिपोर्टों से पता चला है कि चीन बांग्लादेश के लालमोनिरहाट एयरबेस तक रणनीतिक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है।
यह स्थान सिलीगुड़ी कॉरिडोर से लगभग 100 किमी और भारतीय सीमा से मात्र 20 किमी दूर है।
भारतीय विशेषज्ञों के अनुसार, यदि चीन यहां उपस्थिति दर्ज करता है, तो वह पूर्वोत्तर में भारतीय सैन्य गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी कर सकेगा।


भारतीय सेना का बड़ा कदम: सीमा पर तीन नए गारिसन

भारत ने बांग्लादेश और चीन की गतिविधियों के बीच अपनी पूर्वी सीमाओं को सुदृढ़ करने के लिए तीन नए सैन्य ठिकाने स्थापित किए हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार,
नए सैन्य स्टेशन यहां बनाए गए हैं:

  • लाचित बोरफुकन सैन्य स्टेशन, धुबरी (असम)

  • किशनगंज, बिहार

  • चोपड़ा, पश्चिम बंगाल

ये सभी बांग्लादेश सीमा से बेहद नजदीक हैं और सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को पहले से अधिक मजबूत करेंगे।

पूर्वी कमान ने बढ़ाई निगरानी

पूर्वी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी ने इन स्टेशनों का दौरा करते हुए सैनिकों से हाई अलर्ट पर रहने को कहा।
साथ ही यह भी माना कि चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लगातार ढांचे का विस्तार गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।


भारत की बड़ी ताकत: राफेल, ब्रह्मोस और एडवांस एयर-डिफेंस

सिलीगुड़ी गलियारे और सिक्किम की सुरक्षा का दायित्व संभाल रही त्रि-शक्ति कोर के पास पहले से ही राफेल फाइटर जेट, ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें और उन्नत वायु रक्षा प्रणालियां मौजूद हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन हथियारों की तैनाती से ‘‘कोई भी दुश्मन आक्रामक कदम उठाने से पहले सौ बार सोचेगा।’’


इसे भी पढ़ें : तीन दिन से लापता युवक का शव छोटी गंडक नदी में मिला, गांव में मातम; पुलिस जांच में जुटी

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