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यूजीसी के नए ‘समानता विनियम, 2026’ पर बवाल, दिल्ली से लखनऊ तक प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

Published on: January 28, 2026
UGC's new 'equality regulations'

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियम ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता विनियम, 2026’ को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सामान्य वर्ग के छात्र और संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। राजधानी दिल्ली में यूजीसी मुख्यालय के बाहर मंगलवार से विरोध प्रदर्शन जारी है, जबकि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल कर दी गई है।

दिल्ली में यूजीसी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन

यूजीसी द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी किए गए नए नियमों के विरोध में मंगलवार सुबह से दिल्ली स्थित यूजीसी मुख्यालय के बाहर सामान्य वर्ग के प्रतिनिधि प्रदर्शन कर रहे हैं। स्थिति को देखते हुए वहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। मुख्य द्वार पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और किसी भी प्रदर्शनकारी को यूजीसी कार्यालय के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है।

राज्यों में भी विरोध, सोशल मीडिया पर अभियान

दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार में भी यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विरोध देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बड़ी संख्या में सामान्य वर्ग के छात्र सड़कों पर उतरे और नियमों को वापस लेने या संशोधन की मांग की। बिहार के कई जिलों से भी प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं।
जमीनी आंदोलन के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी यूजीसी नियमों के खिलाफ व्यापक अभियान चल रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए नियम सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की गई। यह याचिका अधिवक्ता विनीत जिंदल द्वारा दायर की गई है, जिसमें नियमों को सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला बताया गया है।
याचिका में मांग की गई है कि यूजीसी रेगुलेशंस-2026 के नियम 3(सी) के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए और 2026 के नियमों के तहत बनाई गई व्यवस्था सभी जातियों के लिए समान रूप से लागू की जाए। इससे पहले भी एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए नियम 3(सी) को मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की जा चुकी है।

सरकार का पक्ष

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार जल्द ही यूजीसी के नए नियमों को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण दे सकती है। सरकार का मानना है कि बजट सत्र से पहले इस मुद्दे पर विपक्ष द्वारा सामान्य वर्ग को गुमराह किया जा रहा है। साथ ही यह भी कहा गया है कि नए नियमों का किसी भी तरह का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बरेली के नगर मजिस्ट्रेट का इस्तीफा

इस विवाद के बीच बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए नियमों समेत सरकारी नीतियों से नाराजगी जताते हुए सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें साजिश के तहत फंसाने और निलंबित करने की कोशिश की जा रही थी। उनके इस कदम ने विवाद को और हवा दे दी है।

नियमों पर विवाद क्यों?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में कहा गया है कि यूजीसी के नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के नाम पर कुछ वर्गों, खासकर सामान्य वर्ग, के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि नियम 3(सी) संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। साथ ही यह यूजीसी अधिनियम, 1956 के उद्देश्य के भी खिलाफ है।

क्या हैं यूजीसी के नए नियम?

यूजीसी के नए नियमों के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र की स्थापना अनिवार्य की गई है। इनका उद्देश्य विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की शिकायतों का समाधान करना है।

फिलहाल, देशभर में जारी विरोध, कानूनी चुनौती और सरकार के संभावित जवाब के बीच यह देखना अहम होगा कि यूजीसी के नए नियमों पर आगे क्या फैसला होता है।


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