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संसदीय समिति ने एचआईएएल को यूजीसी मान्यता देने की सिफारिश, काम को बताया अनुकरणीय

Published on: December 16, 2025
Parliamentary Committee HIAL

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : पर्यावरणविद् और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक द्वारा स्थापित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (HIAL) के काम को संसद की स्थायी समिति ने शानदार और अनुकरणीय बताया है। शिक्षा, महिला, युवा और खेल मामलों से जुड़ी स्थायी संसदीय समिति ने एचआईएएल को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की मान्यता देने की सिफारिश की है।

इस सप्ताह की शुरुआत में संसद में पेश की गई रिपोर्ट में कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने इस बात पर चिंता जताई कि एचआईएएल को अब तक यूजीसी की मान्यता नहीं मिल पाई है। समिति ने शिक्षा मंत्रालय को सलाह दी कि वह एचआईएएल के मॉडल का गंभीरता से अध्ययन करे और शिक्षा में नवाचार केंद्रों या अन्य माध्यमों से इस मॉडल को देश के अन्य हिस्सों में दोहराने की संभावनाओं पर विचार करे।

लद्दाख दौरे में समिति हुई प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार, लद्दाख दौरे के दौरान समिति एचआईएएल के शैक्षणिक, शोध और उद्यमिता आधारित पारिस्थितिकी तंत्र से काफी प्रभावित हुई। खासतौर पर स्थानीय सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संदर्भों से जुड़ी अनुभवात्मक शिक्षा को सफलतापूर्वक लागू करने की इसकी पहल को सराहा गया।

यूजीसी मान्यता में देरी पर जताई चिंता

समिति ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि यूजीसी ने कई वर्षों से लंबित मामले के बावजूद अब तक एचआईएएल को मान्यता नहीं दी है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि एचआईएएल ने स्थानीय समुदाय पर गहरा प्रभाव डाला है और ‘आइस स्तूप’ सहित विभिन्न सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।

समिति ने यह भी कहा कि एचआईएएल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को जमीन पर उतारने का बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें अनुभवात्मक और परियोजना आधारित शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता और भारतीय ज्ञान प्रणालियों के समावेश पर जोर दिया गया है। समिति ने दोहराया कि यूजीसी को एचआईएएल को शीघ्र मान्यता देनी चाहिए और इसके मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए गहन अध्ययन किया जाना चाहिए।

एनएसए के तहत हिरासत में हैं सोनम वांगचुक

गौरतलब है कि लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुई हिंसक घटनाओं के बाद 26 सितंबर को सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था। इन घटनाओं में चार लोगों की मौत और करीब 90 लोग घायल हुए थे। सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था।

इसके बाद लद्दाख प्रशासन ने एचआईएएल को आवंटित भूमि को रद्द कर दिया, वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए संस्थान का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) पंजीकरण भी रद्द कर दिया।



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