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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सियासत तेज, प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार को घेरा

Published on: June 25, 2026
On the Ram Mandir offering controversy

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा और दान राशि में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर अब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर सरकार और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठाए हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए सवाल

प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने पोस्ट में कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन वर्ष 2020 में हुआ था। उन्होंने दावा किया कि नवंबर 2020 में ट्रस्ट ने एक ऑडिट फर्म से आंतरिक ऑडिट (इंटरनल ऑडिट) और रिस्क मैनेजमेंट को लेकर सुझाव मांगे थे।

उनके अनुसार, ऑडिट फर्म ने कई कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया था और कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने की सिफारिश की थी। हालांकि, आरोप है कि इन सुझावों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया।

प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाता, तो कथित तौर पर चंदे और आभूषणों से जुड़ी अनियमितताओं की नौबत नहीं आती। उन्होंने अपने पोस्ट का अंत “हे राम!” लिखकर किया।

भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप

इससे पहले भी प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर और मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

हालांकि भाजपा और ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर पहले भी जवाब दिया जाता रहा है और कहा गया है कि सभी मामलों की जांच की जा रही है।

क्या है कथित चढ़ावा अनियमितता का मामला?

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान और सोने-चांदी के आभूषणों के प्रबंधन में अनियमितताएं हुई हैं। विपक्ष ने कथित तौर पर करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया है।

इन आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।

SIT जांच में क्या सामने आया?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एसआईटी की प्रारंभिक जांच में कुछ प्रशासनिक और रिकॉर्ड प्रबंधन संबंधी कमियां सामने आई हैं। जांच में कथित तौर पर यह पाया गया कि:

  • चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया में कुछ अनियमितताओं के संकेत मिले।
  • कुछ सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं थे या डिलीट पाए गए।
  • सोने-चांदी के आभूषणों के रिकॉर्ड प्रबंधन में कमियां पाई गईं।
  • दान और चढ़ावे के दस्तावेजीकरण को और अधिक व्यवस्थित बनाने की आवश्यकता महसूस हुई।

हालांकि, जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

150 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंपी

तीन सदस्यीय एसआईटी ने अपनी अंतरिम जांच रिपोर्ट तैयार कर उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। बताया जा रहा है कि लगभग 150 पन्नों की यह रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी गई है।

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी एक सप्ताह के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत करेगी। इसके बाद रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी और आवश्यक कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल इस मामले में जांच प्रक्रिया जारी है और किसी भी पक्ष को दोषी ठहराने संबंधी अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।


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