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भारत की बड़ी छलांग: स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk-1A ने भरी पहली उड़ान, बोले राजनाथ — ‘आत्मनिर्भर भारत की उड़ान’

Published on: October 18, 2025
India's great leap Swadeshi

द देवरिया न्यूज़ : भारत ने रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। शुक्रवार को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk-1A ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग डिविजन से अपनी पहली उड़ान भरी। यह क्षण भारत की रक्षा तकनीक और स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। इस ऐतिहासिक उड़ान के साक्षी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह स्वयं मौजूद रहे।

नासिक में रचा गया इतिहास

तेजस Mk-1A की पहली उड़ान HAL के नासिक स्थित तीसरे प्रोडक्शन यूनिट से हुई। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने न केवल तेजस Mk-1A की नई उत्पादन लाइन का उद्घाटन किया, बल्कि HAL के HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट की दूसरी उत्पादन लाइन का भी शुभारंभ किया। यह कदम भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाला साबित होगा।

कार्यक्रम के दौरान तेजस Mk-1A के अलावा सुखोई Su-30 और HTT-40 विमानों ने भी आसमान में उड़ान भरी। इन विमानों को एकसाथ उड़ते देख राजनाथ सिंह ने कहा कि यह दृश्य भारत की तकनीकी शक्ति और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक है।

‘ये उड़ान आत्मनिर्भर भारत की मिसाल है’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा,

“आज नासिक की इस पवित्र भूमि से तेजस Mk-1A की उड़ान केवल एक विमान की उड़ान नहीं है, बल्कि यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की उड़ान है। जब मैंने सुखोई, तेजस और HTT-40 को एकसाथ उड़ान भरते देखा तो गर्व से सीना चौड़ा हो गया।”

उन्होंने कहा कि HAL ने पिछले छह दशकों में भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। नासिक यूनिट ने विशेष रूप से भारतीय वायुसेना के लिए विश्वसनीय और आधुनिक विमान तैयार किए हैं, जो देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

रक्षा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है भारत

राजनाथ सिंह ने कहा कि एक समय भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

“पहले देश में 65 से 70 प्रतिशत रक्षा उपकरण बाहर से मंगाए जाते थे। आज भारत लगभग 65 प्रतिशत उत्पादन खुद कर रहा है। हमारा लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे 100 प्रतिशत तक पहुंचाना है,” उन्होंने कहा।

रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड अब 25 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है, जो कुछ साल पहले एक हजार करोड़ रुपये से भी कम था। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक तीन लाख करोड़ रुपये का घरेलू रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये का निर्यात हासिल करने का है।

तेजस Mk-1A: भारत का अत्याधुनिक स्वदेशी फाइटर जेट

तेजस Mk-1A एक 4.5 पीढ़ी का स्वदेशी मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे HAL ने भारतीय वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया है। यह हल्का, तेज और आधुनिक तकनीक से लैस है। इसमें इस्राइली EL/M-2052 AESA रडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, जैमर सिस्टम और बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल क्षमता शामिल है।

इस विमान की खासियत यह है कि यह हर मौसम में मिशन ऑपरेशन करने में सक्षम है। यह न केवल वायु रक्षा के लिए बल्कि जमीनी और समुद्री लक्ष्यों पर सटीक हमला करने में भी सक्षम है। तेजस Mk-1A की अधिकतम रफ्तार 1.6 माख (करीब 2000 किमी/घंटा) है और यह 50,000 फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है।

भारतीय वायुसेना को मिलेंगे 83 तेजस विमान

HAL ने बताया कि आने वाले चार वर्षों में भारतीय वायुसेना को 83 तेजस Mk-1A विमान सौंपे जाएंगे। इन विमानों की आपूर्ति में कुछ देरी अमेरिकी इंजन की आपूर्ति के कारण हुई है, लेकिन अब उत्पादन की गति तेज की जा रही है।

वर्तमान में HAL की नासिक यूनिट हर साल 8 लड़ाकू विमान बनाने में सक्षम है। इसके अलावा, बेंगलुरु स्थित दो प्रोडक्शन लाइनें 16 विमान प्रतिवर्ष तैयार कर रही हैं। अब नासिक यूनिट के जुड़ने से कुल वार्षिक क्षमता 24 विमान हो जाएगी।

‘नासिक बनेगा आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक’

रक्षा मंत्री ने कहा कि नासिक भगवान शिव की त्र्यंबकेश्वर भूमि है, जो आस्था और शक्ति का प्रतीक है। आज यह स्थान आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान बन रहा है। उन्होंने कहा कि HAL देश की रक्षा ताकत का मजबूत स्तंभ है, और भारत को जल्द ही दुनिया के अग्रणी रक्षा निर्माता देशों में शामिल करेगा।

तेजस Mk-1A की पहली उड़ान न केवल भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” के विजन की ओर एक ठोस कदम भी है। यह विमान भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और आने वाले समय में भारत को रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।


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