Breaking News
ट्रेंडिंग न्यूज़देवरिया न्यूज़उत्तर प्रदेश न्यूज़राष्ट्रीय न्यूज़अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़राजनीतिक न्यूज़अपराधिक न्यूज़स्पोर्ट्स न्यूज़एंटरटेनमेंट न्यूज़बिज़नस न्यूज़टेक्नोलॉजी अपडेट लेटेस्ट गैजेट अपडेटमौसम

जांच पर समयसीमा अपवाद है, नियम नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

Published on: January 4, 2026
There is an exception to the deadline on investigation
द देवरिया न्यूज़,दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी मामले की जांच पूरी करने के लिए समयसीमा तय करना सामान्य नियम नहीं, बल्कि एक अपवाद है। अदालत ने कहा कि जांच में अत्यधिक और अनुचित देरी होने पर ही न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक होता है, जब इससे आरोपी के मौलिक अधिकार प्रभावित होने लगें।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. के. सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश की समीक्षा करते हुए की। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को एक मामले में 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया था और आरोपियों को दमनात्मक कार्रवाई से संरक्षण भी प्रदान किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि शुरुआत से ही जांच एजेंसियों पर समयसीमा थोपना कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में अनुचित हस्तक्षेप के समान है। पीठ ने माना कि जांच कई कारकों पर निर्भर करती है और इसमें स्वाभाविक रूप से अनिश्चितता बनी रहती है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि समयसीमा “रिएक्टिव” रूप से तय की जाती है, न कि “प्रोफिलैक्टिक” रूप से। यानी अदालतें तभी हस्तक्षेप करती हैं, जब रिकॉर्ड से यह साफ हो जाए कि जांच में अनुचित देरी, ठहराव या लापरवाही हो रही है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित जांच और समय पर न्याय हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। यदि एफआईआर दर्ज होने के बाद चार्जशीट दाखिल करने में अत्यधिक और बिना कारण देरी होती है, तो यह व्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा असर डालती है। कोर्ट ने कहा कि जांच को अनिश्चित काल तक लंबित नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब आरोपी लंबे समय तक संदेह के घेरे में बना रहे।
शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा आरोपियों को दी गई व्यापक सुरक्षा पर भी आपत्ति जताई। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को केवल दो सप्ताह की अंतरिम राहत दी जाएगी, इसके बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकेगी। फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि जांच की स्वतंत्रता और आरोपी के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

इसे भी पढ़ें : संगम तट पर माघ मेले का शुभारंभ, पौष पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी


Discover more from thedeoria.news : : Voice of rural India - ग्रामीण भारत की आवाज़

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Read Also

Leave a Reply

error: Content is protected !!